बाल विवाह मुक्त बनाने हेतु सेक्टरों में किया जा रहा है प्रचार-प्रसार

बीजापुर :- कलेक्टर संबित मिश्रा के निर्देशन पर जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री कांता कुमार मेश्राम के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा ग्राम पंचायतो में शिविर/आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम एवं स्कूल/कॉलेजों में जागरूकता अभियान कार्यक्रम कर बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों/महिलाओं एवं किशोर-किशोरियों जागरूक किया जा रहा है, जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए जिले में कार्यरत बीजादूतीर स्वयं सेवकों का भी सहयोग लिया जा रहा है।
बाल विवाह रोकने के लिए जनजागरूकता जरूरी – बाल विवाह की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब प्रशासन और समाज मिलकर इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाये और गांव-गांव में बाल विवाह के दुष्प्रभाव की जानकारी देना आवश्यक है ताकि समाज में महिला, बच्चे, किशोरी समाज प्रमुख एवं विवाह आयोजन में सामिल विभिन्न स्टैक होल्डर जैसे- टैंट, बाजा, पुजारी, पास्टर, मौलाना, गायता एवं पेरमा धार्मिक प्रमुख सभी जागरूक हो इसे रोकने के लिए स्वयं आगे आये। 6 से 14 वर्ष के आयु के बच्चों को शिक्षा को सुनिश्चित करना और किसी विद्यार्थी को बीच में पढ़ाई न छोड़ने देना इस समस्या के स्थायी समाधान हो सकता है इसके लिए आभिभावकों विशेष प्रयास करने की आवश्यकता होगी अशिक्षा एवं जागरूकता कमी बाल विवाह के प्रमुख कारण है। कानूनी शक्ति समाजिक भागीदारी आवश्यक है। प्रचार-प्रसार के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा 10 मार्च 2024 को बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का शुभारंभ किया गया। उक्त अभियान के प्रभावी रोकथाम के लिए जिले में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के बारे में विस्तृत जानकारी बीजादूतीर स्वयं सेवकों को दिया गया जिसमे अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया गया कि ऐसा विवाह जिसमें वर की आयु 21 वर्ष से कम और वधु की आयु 18 वर्ष से कम यानी अव्यस्क हो उसे बाल विवाह माना जायेगा।

बाल विवाह एक सामाजिक कुप्रथा है जिसके सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक कारण हो सकते है प्रत्येक सामाज प्रमुख, धर्म प्रमुख, स्वयं सेवक को आगे आना होगा ताकि इनके सभी कारणो में विचार विर्मश करके इस समस्या को पूरी तरह समाप्त करना और एक सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाना है इस अवसर पर स्वयं सेवको को यह भी बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के उनके अधिकारो और उनके विकास को प्रभावित करता है यह विकास में रूकावट डालने वाली गंभीर समस्या है इसके पूर्ण रोकथाम के लिए समाजिक, कानूनी एवं आर्थिक स्तर पर लोगो को जागरूक करना और कुप्रथा के दुष्परिणामो को समझाना महत्वपूर्ण है ताकि प्रभावी तरीके से रोका जा सके और बच्चो का सर्वागिंण विकास सुनिश्चित किया जा सके इसके साथ यह भी बताया गया कि 18 वर्ष के अधिक आयु का पुरूष 18 वर्ष की कम आयु की महिला से विवाह करता तो उसे 2 वर्ष तक की कठोर कारावास या जुर्माना जो कि 1 लाख तक का हो सकता है या दोनो से दडित किया जा सकता है इसके अलावा जो भी व्यक्ति बाल विवाह करवाता है या उसकी सहायता करता है तो उसे भी 2 वर्ष की कठोर कारावास या जुर्माना जो कि 1 लाख तक का हो सकता है या दोनो से दडित किया जा सकता है बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना बीजापुर/भैरमगढ़/कुटरू/ उसूर/बासागुड़ा/भोपालपटनम के समस्त सेक्टर पर्यवेक्षक एवं पंचायत सचिव बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी है। बाल विवाह मुक्त बनाने में सहयोग देने हेतु जन जागरूकता के माध्यम से आमजनों से आग्रह करते हुए शपथ एवं हस्ताक्षर अभियान कराया जा रहा है।

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