खतरे में है आदिवासी समाज?

जगदलपुर। सर्व आदिवासी समाज ने बस्तर संभाग में आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए चिंता जताई है। समाज ने दंतेवाड़ा में रेल्वे ओवरब्रिज को आवश्यक बताते हुए जल्द से जल्द इसका निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की। साथ ही दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए डीएमएफ मद की 300 करोड़ राशि का इस्तेमाल किए जाने को अनुचित ठहराते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा फंड का प्रावधान है, तो खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाली डीएमएफ मद की राशि का उपयोग मेडिकल कॉलेज निर्माण में करना गलत है।
प्रेस वार्ता में समाज के दंतेवाड़ा जिलाध्यक्ष सुरेश कर्मा व संरक्षक बल्लू भवानी ने कहा कि बैलाडीला की खदानों में खनन कार्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएमडीसी पहले से कर रही है। लेकिन सरकार 70 साल में खोदे जाने वाले लौह अयस्क को 10 साल में हो खोद कर खत्म करना चाहती है। इसीलिए खदानों को निजी कंपनियों को बेच रही है। इससे क्षेत्र में पर्यावरण का समूल नाश होने वाला है। इसी तरह सड़क, बांध व अन्य परियोजनाओं के नाम पर जमीनों का मनमाने ढंग से अधिग्रहण किया जा रहा है। ग्राम सभा की सहमति के बगैर जमीन ली जा रही है। अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की मनाही है, लेकिन भू-माफियाओं की साजिश के चलते धड़ल्ले से लीज के नाम से कब्जा जमाया जा रहा है। इसकी रोकथाम के लिए समाज भू राजस्व संहिता में संशोधन की मांग करेगा। सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आदिवासियों की आवाज मुखरता से उठाने वाले पूर्व मंत्री कवासी लखमा जेल भेज दिए गए और मनीष कुंजाम के घर छापा मार कार्रवाई की गई। यह आदिवासियों की आवाज दबाने की साजिश के तहत हो रहा है। शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया जिस तरह से किया जा रहा है उससे शालाओं में विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हो पा रही है। इससे आदिवासी अंचल में शिक्षा की गुणवत्ता की कल्पना हम कैसे कर सकते हैं? बच्चों की संख्या के आधार पर नहीं अपितु कक्षा और विषयवार शिक्षकों की पदस्थापना की जानी चाहिए। कानून और वन अधिकार कानून के प्रावधान अनुसार बस्तर में क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। नगरनार का निजीकरण कर के बस्तर को बड़ी कंपनियों के हवाले करने का प्रयास किया जा रहा है। बल्लू भवानी ने कहा कि आश्रम शालाओं छात्रावासों में लगातार आदिवासी बेटियों के साथ बलात्कार और लैंगिक उत्पीड़न की घटनाएं हो रही है। नाबालिग आदिवासी छात्रा के गर्भवती होने के मामले में दोषी अधिकारी-कर्मचारियों को बचाया जा रहा है। बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में बांग्लादेशी अवैध घुसपैठियों के द्वारा यहां के प्राकृतिक संसाधन के साथ-साथ मानवीय संसाधनों पर भी अवैध कब्जा किया जा रहा है। समाज की मांग है कि अवैध घुसपैठियों की पूरी जांच करके उनको वापस भेजा जाए। प्रेस वार्ता के दौरान भीमसेन मंडावी, मंगल कुंजाम व सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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