तो फिर ऐसे में कैसे बढ़ेगा इंडिया…….?

मुर्गेश कुमार सेट्टी
भोपालपटनम। सरकारें खूब नारा देती है- पढ़ेगा तो बढ़ेगा इंडिया, स्कूल चलें हम, स्कूल जाबो पढ़े बर, जिनगी ल गढ़े बर,मगर जब बच्चों की पढ़ाई ही ठप हो फिर कैसे आगे बढ़ेगा इंडिया? जब स्कूल में मास्टरजी ही नहीं हैं, तो फिर क्यों स्कूल चलें हम? कुछ यही हाल है बीजापुर जिले की भैरमगढ़ तहसील की ग्राम पंचायत केशकुतुल के आश्रित ग्राम केशामुंडी की प्राथमिक शाला का है। यह शाला इन दिनों शिक्षकों के अभाव में वीरान पड़ी है।
स्कूल खुले सवा महीना बीत चुका से है। 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अब तक एक भी शिक्षक की नियुक्ति केशमुंडी की प्राथमिक शाला में नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शराब दुकानें समय पर खुल सकती हैं, तो फिर बच्चों को शिक्षा देने के लिए स्कूल क्यों नहीं खुलते? शिक्षकों की अनुपस्थिति का कारण पूछने पर शिक्षा विभाग द्वारा संतोषजनक जवाब तक नहीं दिया जा रहा है। शिक्षा दूत तक देने से इंकार कर दिया गया। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस स्कूल का जवाबदेह कौन है? गांव के लोग सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज़ उठा रहे हैं और स्कूल की बदहाली की तस्वीर भी साझा कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि तत्काल शिक्षक की नियुक्ति की जाए और स्कूल संचालन सुनिश्चित किया जाए।गौरतलब है कि यह मामला सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना उसका हक है। लेकिन केशामुंडी के बच्चों के साथ यह हक अभी भी दूर की बात लगता है। सवाल उठता है कि एक महीने से अधिक समय से स्कूल में शिक्षक क्यों नहीं पहुंचे? शिक्षा विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की? बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? ग्रामीणों और पालकों ने शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है
यह समाचार एक स्थानीय सोशल मीडिया इन्फेलुएंसर की रिपोर्ट से संकलित किया गया है, जिसे ग्रामीणों ने साझा किया है। जिस शख्श ने इसे सोशल मीडिया में डाला है उनका नाम सुखराम कावासी है और वह ग्राम पंचायत केसकुतुल के वार्ड क्रमांक 7 प॑च है

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