अब अंतागढ़ इलाके में भी कन्वर्जन का विरोध

अर्जुन झा-
जगदलपुर। धर्म, परंपरा और संस्कृति पर अतिक्रमण के खिलाफ बस्तर में चल रही पुनर्जागरण की लहर प्रबल हो चली है। खासकर संभाग के कांकेर जिले के आदिवासी मतांतरण के विरुद्ध कुछ ज्यादा ही मुखर हो उठे हैं। इस जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक के बाद अब अंतागढ़ ब्लॉक में भी कन्वर्जन के खिलाफ ग्रामीणों की लामबंदी शुरू हो गई है। अंतागढ़ की ग्राम पंचायत हवेचुर बोदेनार में भी पास्टर, पादरी, नन और कन्वर्जन करने वालों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। गांव के प्रवेश द्वार पर प्रवेश की मनाही संबंधी बोर्ड लगाया गया है।

बस्तर संभाग के गांवों में कन्वर्जन के विरोध में और अपनी संस्कृति व परंपराओं को बचाने के लिए आदिवासी मुखर होकर आगे आने लगे हैं। कन्वर्जन विरोधी यह लहर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र से होती हुई अब अंतागढ़ इलाके तक पहुंच चुकी है। यहां के आदिवासी जाग उठे हैं, उनके बीच संस्कृति और परंपराओं का पुनरोदय हो रहा है। जल, जंगल, जमीन और प्रकृति के रखवाले आदिवासी मतांतरण का खुलकर और पुरजोर ढंग से विरोध करने लगे हैं। समूचा आदिवासी समाज मुखर हो उठा है। आदिवासी गांवों में पादरी, पास्टर और ननों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। बस्तर के पांचवी अनुसूची क्षेत्र होने का हवाला देते और जल, जंगल, जमीन पर अपने अधिकार का दावा करते हुए आदिवासी समुदाय कन्वर्जन को अपने धर्म संस्कृति और परंपराओं पर बड़ा आक्रमण मान उसे प्रतिबंधित करने एकजुट हो गया है। भानुप्रतापपुर क्षेत्र ग्राम कुडाल, बांसला और परवी केंवटी में पादरियों, पास्टरों और ननों के प्रवेश पर रोक लगाई जा चुकी है। इन गांवों के प्रवेश द्वारों पर इस संबंध में सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। आदिवासियों का कहना है कि बस्तर की संस्कृति पर हमला नहीं सहेंगे, जल, जंगल, जमीन, संस्कृति पर अतिक्रमण नहीं सहेंगे, जनजातीय समुदाय ही बस्तर की असली पहचान है। यह लहर गांव दर गांव पहुंच रही है और अब अंतागढ़ विकासखंड तक फैल चुकी है। इस ब्लॉक की ग्राम पंचायत हनेचुर में भी कन्वर्जन करने कराने वालों पर सख्ती बरती जा रही है। हनेचुर में हुई सार्वजनिक बैठक में निर्णय लिया गया कि गांव में धर्मांतरण को प्रोत्साहित करने वाले पादरी पास्टरों को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ग्राम समाज ने धर्मांतरण को आदिवासी संस्कृति और परंपराओं पर बड़ा हमला बताते हुए इसका पुरजोर विरोध करने का फैसला लिया है। ऐसे कृत्य को प्रोत्साहित करने वालों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाते हुए गांव के बाहर सूचना फलक लगाया गया है।

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