स्वदेशी की महक से महका बस्तर, अमित शाह ने किया स्थानीय कला और शिल्प का सम्मान, कहा – बस्तर आत्मनिर्भर भारत का अग्रदूत बनेगा

जगदलपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेला और बस्तर दशहरा लोकोत्सव में शिरकत की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा नक्सली हिंसा की दशकों की त्रासदी से बाहर निकलकर अपनी संस्कृति को सहेजते नए बस्तर की आकांक्षाओं का प्रतीक है।

शाह ने मंच से बस्तरवासियों से संवाद करते हुए कहा कि अब बस्तर बदल रहा है, यहाँ का हर गाँव और हर घर विकास की नई रोशनी से जगमगा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और बस्तर इसका मजबूत स्तंभ बनेगा।

स्थानीय कलाकारों की रचनाओं से हुए मंत्रमुग्ध

स्वदेशी मेले में लगे स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए अमित शाह ने स्थानीय कलाकारों की हस्तकला, शिल्प और अनूठे स्वदेशी उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों में बस्तर की मिट्टी की खुशबू और यहाँ के लोगों का परिश्रम झलकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर सराहना करते हुए लिखा कि बस्तर मेले में स्थानीय कलाकारों की अद्भुत हस्तकला, शिल्प और स्वदेशी उत्पाद देखकर मन आनंद से भर गया।

नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार की ओर बस्तर

गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि बस्तर बहुत जल्द लाल आतंक से पूर्णतः मुक्त होगा और देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर की नई पीढ़ी बंदूक नहीं, कलम और कला से अपनी पहचान बनाए। जिसमें स्वदेशी मेला भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

स्थानीय कला और स्वदेशी उत्पादों का अद्भुत प्रदर्शन

संस्कृति, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संगम है ‘स्वदेशी मेला’। लालबाग मैदान में चल रहे इस मेले में करीब 300 स्टॉल लगे हैं, जिनमें देश के 20 राज्यों से आए कारीगरों, उद्यमियों और कलाकारों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। बस्तर के लकड़ी और धातु शिल्प से लेकर आदिवासी आभूषण, कपड़ा और जैविक उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान खींचा।
जहां एक ओर हस्तनिर्मित वस्तुएं, पारंपरिक व्यंजन और स्वदेशी उत्पाद प्रदर्शित हैं, वहीं हर शाम लोकनृत्य, गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मेला क्षेत्र जीवंत हो उठता है।

बस्तर अब संघर्ष नहीं, सफलता की पहचान

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आने वाले वर्षों में बस्तर भारत के विकास मॉडल का उदाहरण बनेगा। उन्होंने कहा कि यहाँ का युवा बंदूक नहीं, अब कलम और कारीगरी से अपनी पहचान बनाएगा। यह मेला उसी आत्मविश्वास का प्रतीक है।

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