108 संजीवनी एक्सप्रेस निविदा फिर विवादों में : CGMSC पर ख़ास कंपनी को लाभ पंहुचाने का लग रहा है आरोप

रायपुर।आपातकालीन सेवा डायल 108 संजीवनी एक्सप्रेस के लिए सीजीएमएससी द्वारा निकाला गया तीसरा टेंडर भी विवादों की भेंट चढ़ गया है। सूत्रों के अनुसार इस टेंडर में केवल एक कंपनी ने ही भाग लिया है और अब उस खास कंपनी को विभाग द्वारा काम सौंपने की तैयारी की जा रही है। बार-बार निविदा रद्द करने, सुनियोजित पक्षपात और CGMSC के पिछले भ्रष्टाचार के इतिहास के बावजूद इस विभाग को इस महत्वपूर्ण निविदा का जिम्मा एक बार फिर भ्रष्टाचार की ओर आगे बढ़ रहा है। यह खोजी रिपोर्ट इस घोटाले के काले सच को विस्तार से उजागर करती है।
पहली निविदा: आशाजनक शुरुआत को भ्रष्ट इरादों ने किया बर्बाद
9 अप्रैल, 2025 को, CGMSC ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस के संचालन के लिए एक निविदा जारी की (Ref. No.: S. No.194/CGMSCL/108 Sanjeevani Express/2025-26 Date 09.04.2025, फॉर For Operation, Maintenance and Management of 108 Sanjeevani Express In the state of Chhattisgarh)। यह सेवा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की रीढ़ है। निविदा ने 15 संभावित बोलीदाताओं का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने प्री-बिड मीटिंग में हिस्सा लिया। बोलीदाताओं ने निविदा प्रस्ताव (RFP) में शामिल कई शर्तों पर आपत्तियां उठाईं, जैसे कि अनुभव, टर्नओवर और परियोजना पैमाने से संबंधित मानदंड, जिन्हें वे अनुचित और प्रतिबंधात्मक मानते थे। इन आपत्तियों में तकनीकी और वित्तीय शर्तों की अस्पष्टता और कुछ शर्तों का पक्षपातपूर्ण स्वरूप शामिल था। हालांकि, CGMSC के अधिकारियों ने इन सभी चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिससे यह संकेत मिला कि उनकी मंशा शुरू से ही साफ नहीं थी।
इस अनदेखी के परिणामस्वरूप केवल पांच बोलीदाताओं ने निविदा में हिस्सा लिया। तकनीकी मूल्यांकन के बाद, तीन बोलीदाता योग्य पाए गए: CAMP, जिसने 92 अंकों के साथ सर्वोच्च स्थान हासिल किया; EMRI Green Health Services, जिसने 87 अंक प्राप्त किए; और Jai Ambey Emergency Services, जिसने 80 अंकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। निविदा में गुणवत्ता और लागत आधारित चयन (QCBS) प्रणाली लागू थी, जिसमें तकनीकी अंकों का वजन 80% और वित्तीय अंकों का 20% था। CAMP की मजबूत स्थिति ने इसे अनुबंध का प्रबल दावेदार बनाया था।
प्रथम निविदा आमंत्रित करने का नोटिस:

प्रथम निविदा का तकनीकी मूल्यांकन:

हैरानी की बात है कि वित्तीय बोलियां खोलने से पहले ही CGMSC ने अस्पष्ट “तकनीकी कारणों” का हवाला देते हुए निविदा को 07-07-2025 को रद्द कर दिया। निविदा में एल 1 स्थान को प्राप्त कंपनी CAMP ने इस रद्दीकरण पर कड़ा विरोध दर्ज किया, CGMSC, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, को लिखित शिकायत भेजीं, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की गई। इन शिकायतों में यह भी उल्लेख किया गया कि निविदा रद्द करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया, जो प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। लेकिन न तो CGMSC ने इस मामले में कोई रुचि नहीं दिखाई।
प्रथम निविदा रद्द करने का नोटिस:

दूसरी निविदा: पसंदीदा संस्था के लिए सुनियोजित हेराफेरी
पहली निविदा के रद्द होने का असली कारण तब सामने आया जब CGMSC ने 11 जुलाई, 2025 को दूसरी निविदा जारी की (Ref. No.: S. No.194(R)/CGMSCL/108 Sanjeevani Express/2025-26)। संशोधित RFP की गहन जांच से पता चला कि विभाग ने एक विशेष संगठन—जिसके कथित तौर पर CGMSC अधिकारियों और कुछ सरकारी नेताओं से नजदीकी संबंध थे—को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तों को सुनियोजित तरीके से बदला। पहली निविदा में जमा किए गए सभी बोलीदाताओं के दस्तावेजों तक CGMSC की पहुंच थी, जिसने उन्हें CAMP और अन्य प्रतिस्पर्धियों को कमजोर करने और अपनी पसंदीदा संस्था को बढ़त देने के लिए शर्तों को बदलने का अवसर दिया।

द्वितीय निविदा आमंत्रित करने का नोटिस:

दूसरी निविदा में किए गए प्रमुख बदलाव इस प्रकार थे:
अनुभव मानदंड में हेराफेरी: पहली निविदा में स्वास्थ्य विभाग के लिए आपातकालीन एम्बुलेंस संचालन के 5 वर्ष के अनुभव के लिए 5 अंक और 5 वर्ष से अधिक के लिए 10 अंक दिए गए थे। दूसरी निविदा में इसे बदलकर प्रति वर्ष 1 अंक, अधिकतम 10 वर्षों के लिए 10 अंक कर दिया गया। यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि CGMSC को पहली निविदा के दस्तावेजों से पता था कि पूर्व की एल 1 कंपनी के पास 6 वर्ष का अनुभव था, जबकि उनकी पसंदीदा संस्था के पास 10 वर्ष से अधिक का अनुभव था। इस बदलाव से पूर्व की कंपनी को केवल 6 अंक मिलते, जबकि पसंदीदा संस्था को 10 अंक मिलते।

टर्नओवर मानदंड में बदलाव: पहली निविदा में ₹150 करोड़ के टर्नओवर के लिए 5 अंक और इससे अधिक के लिए 10 अंक निर्धारित थे। दूसरी निविदा में इसे बदलकर ₹150 करोड़ के लिए 5 अंक और ₹200 करोड़ से अधिक के लिए 10 अंक कर दिया गया। CGMSC को पता था कि पसंदीदा कंपनी के अलावा अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों के पास ₹200 करोड़ से अधिक का टर्नओवर नहीं है, जबकि उनकी पसंदीदा संस्था के पास है। यह बदलाव बाक़ी संस्थाओं को कम अंक देने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

एम्बुलेंस संचालन में बदलाव: पहली निविदा में प्रत्येक एम्बुलेंस संचालन अनुबंध के लिए 1 अंक (10 अनुबंधों के लिए अधिकतम 10 अंक) दिए गए थे। दूसरी निविदा में इसे बदलकर 5 अनुबंधों तक सीमित कर दिया गया, लेकिन प्रत्येक अनुबंध में कम से कम 50 एम्बुलेंस होना अनिवार्य कर दिया गया। CGMSC को पहली निविदा के दस्तावेजों से पता था कि उनकी पसंदीदा संस्था को छोड़कर किसी अन्य के पास इतने बड़े पैमाने का अनुभव नहीं था।

नए मानदंड जोड़े गए: दूसरी निविदा में कुछ नए मानदंड जोड़े गए, जैसे कि बोलीदाता को 700 एम्बुलेंस के अनुभव पर 15 अंक निर्धारित थे लेकिन द्वितीय निविदा में इसको बढाकर 1001 एम्बुलेंस तक कर दिया गया है यह शर्त स्पष्ट रूप से CGMSC की पसंदीदा संस्था को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थी, क्योंकि अन्य बोलीदाताओं के पास ऐसा अनुभव नहीं था।

प्री-बिड मीटिंग में सात संगठनों ने हिस्सा लिया और इन पक्षपातपूर्ण शर्तों पर आपत्तियां उठाईं, लेकिन CGMSC ने अपनी पसंदीदा संस्था को लाभ पहुंचाने के लिए प्री-बिड प्रतिक्रियाओं में और भी सूक्ष्म बदलाव किए। नतीजा यह हुआ कि दूसरी निविदा में केवल एक बोलीदाता—CGMSC की पसंदीदा संस्था—ने हिस्सा लिया, क्योंकि अन्य को जीतने की कोई संभावना नहीं दिखी। फिर भी, 22 सितंबर, 2025 को CGMSC ने इस निविदा को भी रद्द कर दिया, संभवतः यह महसूस करते हुए कि उनकी खुली हेराफेरी सार्वजनिक जांच के दायरे में आ सकती है।

द्वितीय निविदा रद्द करने का नोटिस:

तीसरी निविदा: खुलेआम भ्रष्टाचार और सरकारी संरक्षण
दो निविदाओं की विफलता और भ्रष्टाचार के बढ़ते सबूतों के बावजूद, CGMSC ने मात्र दो दिन बाद, 24 सितंबर, 2025 को तीसरी निविदा जारी की (Ref. No.: S. No.194(R1)/CGMSCL/108 Sanjeevani Express/2025-26)। इस RFP में दूसरी निविदा की वही पक्षपातपूर्ण शर्तें बरकरार रखी गईं, बिना किसी महत्वपूर्ण बदलाव के। प्री-बिड मीटिंग में आठ संगठनों ने हिस्सा लिया और कठिन, पक्षपातपूर्ण मानदंडों पर आपत्तियां उठाईं, जिसमें अनुभव और टर्नओवर की शर्तों को और अधिक लचीला करने की मांग की गई। लेकिन CGMSC ने इन मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उनका एकमात्र लक्ष्य अपनी पसंदीदा संस्था को अनुबंध देना था।
सूत्रों के अनुसार, जब तीसरी निविदा की जमा करने की अंतिम तारीख 16 अक्टूबर, 2025 को आई, तो केवल एक बोलीदाता—CGMSC की पसंदीदा संस्था—ने प्रस्ताव जमा किया। यह परिणाम कोई संयोग नहीं था, बल्कि प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म करने की रणनीति का नतीजा था।
तृतीय निविदा आमंत्रित करने का नोटिस:

विवादों से घिरा हुआ है CGMSC का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब CGMSC भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा है। अतीत में भी इस विभाग पर कई गंभीर आरोप लगे हैं, जैसे कि दवाओं की खरीद में अनियमितताएं, फर्जी बिलिंग, और निविदा प्रक्रियाओं में पक्षपात। 2020 में, CGMSC पर दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में ₹500 करोड़ से अधिक की अनियमितताओं का आरोप लगा था, जिसकी जांच CBI को सौंपी गई थी। 2022 में, एक अन्य घोटाले में CGMSC के अधिकारियों पर स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए निविदा शर्तों में हेराफेरी का आरोप लगा था। इन सभी मामलों में जांच शुरू हुई, लेकिन ठोस कार्रवाई का अभाव रहा, और CGMSC के अधिकारियों को बार-बार महत्वपूर्ण निविदाओं का जिम्मा सौंपा गया।
सरकारी ख़ज़ाने की हो रही है बर्बादी
108 संजीवनी एक्सप्रेस निविदा का बार-बार रद्द होना और दोबारा जारी करना सरकारी खजाने की बर्बादी है। प्रत्येक निविदा प्रक्रिया में RFP तैयार करने, प्रकाशन, प्री-बिड मीटिंग आयोजित करने और मूल्यांकन के लिए लाखों रुपये का सार्वजनिक धन खर्च होता है। अनुमान के अनुसार, इन तीन निविदाओं में CGMSC ने कम से कम ₹2-3 करोड़ का खर्च किया, जिसमें सरकारी कर्मचारियों का समय, संसाधन और विज्ञापन लागत शामिल है।

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