बर्दाश्त नहीं करेंगे बस्तर ओलंपिक के भगवाकरण की साजिश: योगेश बैज
जगदलपुर। बस्तर ओलंपिक जैसे जनसंस्कृति का पर्व, जो क्षेत्र की पहचान और गर्व का प्रतीक है, अब राजनीति की भेंट चढ़ता दिख रहा है। बस्तर ओलंपिक के आमंत्रण कार्ड को लेकर लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के जिला पंचायत सदस्य योगेश बैज ने भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। योगेश बैज ने कहा कि बस्तर ओलंपिक की अस्मिता से खिलवाड़ करते हुए उसके भगवाकरण की साजिश रची जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगा।
योगेश बैज ने कहा है कि बस्तर ओलंपिक किसी एक पार्टी का कार्यक्रम नहीं है, यह बस्तर की जनता, उसकी संस्कृति, परंपरा और एकता का उत्सव है। लेकिन भाजपा सरकार इसे राजनीतिक मंच बनाने पर आमादा है। चुने हुए जनप्रतिनिधियों, चाहे वे किसी भी दल के हों, उनके नाम आमंत्रण पत्र से जानबूझकर हटाना भाजपा की ओछी मानसिकता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के उल्लंघन का उदाहरण है। योगेश बैज ने कहा कि कांग्रेस के जिला व जनपद पंचायत सदस्यों, सरपंचों, उपसरपंचों और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों को आमंत्रण कार्ड में स्थान न देना यह साबित करता है कि भाजपा बस्तर में लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बस्तर जिला प्रशासन और आयोजन समिति पर राजनीतिक दबाव बनाकर यह निर्णय लिया गया है, जिससे क्षेत्र में असंतोष और भ्रम का माहौल पैदा हो गया है। योगेश बैज ने कहा कि, यह कार्यक्रम जनता के टैक्स के पैसे से आयोजित हो रहा है, न कि किसी पार्टी के फंड से। ऐसे में केवल एक राजनीतिक विचारधारा के लोगों को प्रमुखता देना लोकतंत्र के सिद्धांतों का अपमान है। श्री बैज ने कहा कि अधिकारी वर्ग भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है, जो यह दर्शाता है कि वे भी दबाव में हैं। योगेश बैज ने आगे कहा कि बस्तर में भाजपा सरकार बार-बार “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती है, लेकिन व्यवहार में वे केवल अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को आगे रखकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को दरकिनार कर रही है। योगेश बैज ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले पर जल्द सुधार नहीं किया गया और चुने हुए सभी जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक कार्यक्रम में स्थान नहीं दिया गया, तो कांग्रेस लोहंडीगुड़ा से लेकर पूरे बस्तर तक जन आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता और लोकतांत्रिक सम्मान की लड़ाई है।
योगेश बैज ने कहा, “हम चाहते हैं कि बस्तर ओलंपिक अपने असली स्वरूप में लौटे, जहां राजनीति नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति और एकता की भावना सर्वोपरि हो।”
