पंजीकृत किसानों का धान नहीं खरीदने पर बरसे कवासी लखमा
जगदलपुर। सुकमा के शेर की दहाड़ एकबार फिर विधानसभा में गूंज उठी।कोंटा से लगातार छठवीं बार विधायक चुने गए कवासी लखमा ने विधानसभा में धान खरीदी का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा।
कवासी लखमा ने कहा कि बस्तर आदिवासी बाहुल्य संभाग है और हमारे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी आदिवासी समुदाय से हैं। इसके बावजूद सरकार आदिवासी किसानों के साथ भेदभाव कर रही है। बस्तर संभाग के सुकमा सहित पांच जिलों के 32 हजार, 200 से भी ज्यादा पंजीकृत किसानों का धान इस खरीदी सीजन में नहीं खरीदा गया है। ये किसान आज आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। किसान बैंक कर्ज और केसीसी लोन नहीं पटा पा रहे हैं, अपने जवान बेटे बेटियों का विवाह नहीं कर पा रहे हैं अपने मकान का निर्माण नहीं करा पा रहे हैं। धान खरीदी पर कवासी लखमा ने कृषि एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को जमकर घेरा। कवासी लखमा की वाकपटुता से खाद्य मंत्री काफी असहज दिखे। उन्होंने केवल सुकमा जिले के ही कुछ जगहों के दोरला आदिवासी किसानों के धान नहीं खरीदे जाने को लेकर सरकार को कटघरे में खड़े कर दिया। लखमा को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भरपूर साथ मिला। श्री बघेल ने भी इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। बता दें कि कवासी लखमा सुकमा जिले की इकलौती विधानसभा सीट कोंटा से लगातार छठवीं बार जीतकर विधानसभा में पहुंचते आ रहे हैं। कवासी लखमा की वाकपटुता और आमजन से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी उन्हें अलग पहचान दिलाती है। ज्यादातर विपक्षी नेता जहां अधिकारियों और मंत्रियों के भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाते हैं, वहीं कवासी लखमा किसान, मजदूर और आदिवासी की आवाज बनकर खड़े नजर आते हैं। यही वजह है कि वे कोंटा की जनता के दिलों पर राज करते हैं, उनके सामने प्रतिद्वंदी टिक नहीं पाता और इसलिए उन्हें कोंटा का शेर कहा जाता है।
