विधायक भावना बोहरा ने विधानसभा में वन अधिकार पट्टा वितरण में हो रहे विलंब के विषय में किया सदन का ध्यानाकर्षण, मंत्री ने कहा प्रदेश स्तर पर जल्द से जल्द करेंगे समस्या का समाधान

कवर्धा,,,पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने आज सदन में वनांचल एवं बैगा आदिवासी व ग्रामीण किसानों के हित के अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को सदन के समक्ष रखा वहीं वन अधिकार पट्टा वितरण में हो रहे विलम्ब से किसानों को आर्थिक व मानसिक रूप से हो रही परेशानी के विषय में विधानसभा सदन का ध्यानाकर्षण किया। वन अधिकार पट्टा वितरण में हो रहे विलंब से आदिवासी व वनांचल क्षेत्रों में किसानों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिलने एवं अपनी फसल बेचने में हो रही समस्या के प्रति भावना बोहरा ने ध्यानाकर्षण में महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत करते हुए विस्तार से इस विषय को रखा। चर्चा के दौरान आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम जी ने कहा कि वन अधिकार पट्टा से संबंधित प्रदेश में जितने भी प्रकरण लंबित हैं उनकी पुनः जांच की जाएगी और वन अधिकारी पट्टा समय पर वितरण करना सुनिश्चित किया जाएगा साथ ही इसमें आने वाली त्रुटियों को जल्द से जल्द दूर कर पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टा दिया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।

भावना बोहरा ने सदन का ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि वन में रहने वाला व्यक्ति अगर अपनी ही जमीन का मालिक न बन सके, तो वन अधिकार कानून का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। जिन लोगों ने पीढ़ियों से जंगल की रक्षा की, आज वही अपने अधिकार के लिए भटक रहे हैं। वन अधिकार पट्टा केवल जमीन का कागज नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और सुरक्षा का अधिकार है। अगर पात्र परिवारों को पट्टा नहीं मिलेगा, तो सरकार की योजनाओं का लाभ भी उन तक नहीं पहुंच पाएगा। सरकार को चाहिए कि लंबित और निरस्त दावों की पुनः समीक्षा कर जल्द से जल्द पात्र लोगों को उनका अधिकार दे। महोदय, यह केवल एक जिला नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के वनांचल एवं आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत लाखों किसानों के हित का विषय है।

उन्होंने इस विषय में विस्तृत जानकरी देते हुए कहा कि सूचना के अधिकार के तहत एक रिपोर्ट के अनुसार वन अधिकार अधिनियम के तहत आवंटित कुल वन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ प्रदेश की हिस्सेदारी देश में सर्वाधिक 43 प्रतिशत है। प्रदेश में अब तक लगभग 5.05 लाख से अधिक वन अधिकार पट्टा वितरित किया गया है जो लगभग 97.63 लाख एकड़ भूमि को कवर करता है। जिसमें से मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 30 जिलों में 4.82 लाख व्यक्तिगत और 4,396 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पट्टा वितरित किया गया है। राज्य में अब तक 8.56 लाख से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार दावे प्राप्त हुए हैं, जिसमें से 4.62 लाख लगभग 52 प्रतिशत दावों को विभिन्न कारणों से अस्वीकृत या निरस्त कर दिया गया है। इन लंबित दावों के कुछ प्रशासनिक व नियम भी इसे प्रभावित कर रहें हैं जो आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को समस्यों का सामना करना पड़ रहा है। अधिनियम के अनुसार 13 सितंबर 2005 से पहले 75 वर्षों का रिकॉर्ड वहां के निवासी होने के लिए प्रस्तुत करना होता है जो कि अधिकांश लोगों के पास इतने पुराने लिखित दस्तावेज पेश नही कर पाते हैं जिससे आवेदन लंबित या निरस्त हो जाते हैं। इसके साथ ही ग्राम सभा और प्रशासनिक समन्वय, तकनीकी और भौगोलिक बाधाएं, डिजिटलीकरण की धीमी गति, वन और राजस्व विभाग के बीच स्वामित्व को लेकर संशय और जागरूकता की कमी भी इसके मुख्य कारण है।

भावना बोहरा ने कबीरधाम जिला के सन्दर्भ में बताया कि कबीरधाम जिले में लगभग 10519 आवेदन इसलिए निरस्त किये गए हैं कि उनके पास 13 दिसंबर 2005 के पूर्व कब्जा संबंधी साक्ष्य नही थे। तो यह चिंतनीय है कि प्रदेश भर में कितने आवेदन निरस्त किए गए होंगे। वहीं पंडरिया विधानसभा में कुल 1817 आवेदन में 216 आवेदन कब्जा व अधिनियम के तहत 09 बिन्दुओ की जाँच में विभिन्न दस्तावेजों की कमी के कारण निरस्त किये गए हैं। तथा पात्र 1601 लाभार्थियों में से अब तक पूर्ण रूप से धीमी प्रक्रिया के चलते वितरण सम्भव नही हो पाया। इससे हो रही परेशानी का उल्लेख करते हुए भावना बोहरा ने बताया कि किसानों के भूमि स्वामी के रूप में पंजीयन नही होने की वजह से फसल बीमा, DBT आधारित कृषि योजनाओं का उन्हें लाभ नही मिल रहा है वहीं इनपुट सब्सिडी से भी वे वंचित हो रहें हैं। कई जिलों में निवासरत आदिवासी, बैगा जनजाति एवं वन निवासियों को पट्टा नही मिलने के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपना धान नही बेच पा रहें और कम दामों पर उन्हें निजी व्यापारियों को अपना धान बेचने बाध्य हो रहें हैं जिससे उन्हें आर्थिक व मानसिक नुकसान हो रहा है। प्रदेश में एग्री-स्टैक और किसान डेटाबेस के एकीकरण में भूमि रिकॉर्ड लिंक अनिवार्य किया गया है। FRA- Forest Right Act (वन अधिकार अधिनियम) पट्टा लंबित होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों का एग्री-स्टैक में पंजीयन नहीं हो रहा।

भावना बोहरा ने वन अधिकार पट्टा ण मिलने से किसानों को हो रही समस्या के निराकरण के प्रश्न किया कि क्या सरकार यह बताएगी कि छत्तीसगढ़ में अब तक कुल कितने वन अधिकार पट्टा के आवेदन आए, उनमें से कितने स्वीकृत, कितने निरस्त और कितने लंबित हैं? क्या कारण है कि हजारों पात्र वनवासी परिवारों को आज भी उनका वन अधिकार पट्टा नहीं मिल पाया है, जबकि इसके लिए स्पष्ट कानून मौजूद है? क्या सरकार यह मानती है कि ग्राम सभा की प्रक्रिया और सर्वे में कमियों के कारण कई पात्र लोगों के आवेदन निरस्त हुए हैं? क्या यह सही है कि पट्टा नहीं मिलने के कारण कई वनवासी परिवार कृषि योजनाओं, बैंक ऋण और सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं? क्या सरकार उन आवेदनों की पुनः जांच (Review) कराने के लिए कोई विशेष अभियान चलाने जा रही है जिन्हें पहले निरस्त कर दिया गया था? क्या सरकार यह बताएगी कि लंबित दावों के निराकरण के लिए कोई समय सीमा तय की जाएगी ताकि पात्र परिवारों को जल्द उनका अधिकार मिले? इन सभी प्रमुख सवालों के साथ उन्होंने वनांचल में रहने वाले बैगा आदिवासी व ग्रामीण किसानों के हित में सदन का ध्यानाकर्षण किया और जल्द से जल्द इस समस्या का निराकरण करने की मांग भी सदन में की, जिसके उत्तर में मंत्री जी ने जल्द से जल्द सभी त्रुटियों को दूर कर आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्र के किसानों की समस्या का समाधान करने आश्वस्त किया।

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