भालुओं के आतंक से मुक्ति दिलाने बीएसपी ने की पहल, मगर वन विभाग ने नहीं निभाया अपना फर्ज



अर्जुन झा-
दल्ली राजहरा। लौह अयस्क नगरी दल्ली रजहरा के नागरिक दहशत के साये में जी रहे हैं। लोगों की नींद उड़ी हुई और वन विभाग के अधिकारी एसी की शीतल हवाओं के बीच चैन की नींद सो रहे हैं। उन्हें नागरिकों की जान की जरा भी परवाह नहीं हैं। नागरिकों में फैली दहशत की वजह वो जंगली भालू हैं, जो शाम ढलते ही शहर में घुस आते हैं। यह क्रम कई हफ्तों से जारी है।ये भालू कभी भी नागरिकों रात में सफर करने वाले लोगों और पालतू मवेशियों पर हमला कर सकते हैं।. बावजूद वन विभाग को लोगों की जान की जरा भी फिक्र नहीं है। विभाग ने भालुओं को खदेड़ने के लिए न रात्रि गश्त का इंतजाम किया है और न ही कोई जरूरी उपाय किए हैं। वहीं बीएसपी प्रबंधन ने अपने सूत्र वाक्य ‘हर किसी की जिंदगी से जुड़ा है सेल’ पर अमल करते हुए प्रभावित क्षेत्रों दूधिया रौशनी की व्यवस्था की है।
दरअसल दल्ली राजहरा नगर के वार्ड क्रमांक 2 एवं वार्ड क्रमांक 5 में भालुओं का आतंक पिछले कई हफ्तों से मचा हुआ है। जंगल क्षेत्र से लगा होने के कारण इन दोनों वार्डों में शाम को अंधेरा घिरते ही जंगली भालू घुस आते हैं। संभवतः पानी और भोजन की तलाश में भालू यहां धमक रहे हैं। मामले की शिकायत स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा वन विभाग एवं बीएसपी प्रबंधन से की गई थी। इस मसले पर वन विभाग के अधिकारियों तो जरा भी ध्यान नहीं दिया, मगर बीएसपी प्रबंधन ने अपने दायित्व पर अमल करते हुए भालू प्रभावित क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता और तेज रौशनी बिखेरने वाली 10 फ्लड लाइट लगवाई हैं। भालू जंगल से लगे दोनों वार्डो में अंधेरा होने के कारण घुस जाते हैं। बीएसपी के इलेक्ट्रिकल विभाग के सहायक महाप्रबंधक एसपी सिंग ने बताया कि जन सुरक्षा सेल की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि भालू प्रभावित क्षेत्र वार्ड 2 और 5 में जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में उच्च गुणवत्ता वाली फ्लड लाइटें लगाई गई हैं। फ्लड लाइटें 256 दफाई चौक, माइंस क्षेत्र के प्रवेश द्वार के पास, शिकारी बाबा मंदिर परिसर, शीतला माता मंदिर के आसपास, शिकारी बाबा मंच के पास, शंकर तालाब के पास, चट्टा दफाई के पास, पंडर दल्ली पंप हाऊस के पास एवं आगे की बस्ती को फोकस कर लगाई गईं हैं। इन लाइटों की तेज रोशनी से भालुओं में डर व्याप्त होगा।

वन विभाग की ऎसी लापरवाही!
लाइटें लगने के बाद उम्मीद है कि भालू वार्ड में नहीं जा पाएंगे और वार्डवासियों का डर समाप्त हो जाएगा। ऐसा भी संभव है कि अब भालू नगर के दूसरे इलाकों या फिर आसपास के गांवों में दस्तक देने लग जाएं। इसे लेकर भी लोगों में चिंता बनी हुई है, मगर वन विभाग के अधिकारी लगातार लापरवाही बरतते आ रहे हैं। वन विभाग ने नागरिकों की सुरक्षा के अब तक कोई इंतजाम नहीं किए हैं। भालुओं को सुदूर जंगलों तक खदेड़ने के लिए वन अमले की ड्यूटी अब तक नहीं लगाई गई है। रेंजर, डिप्टी रेंजर फारेस्ट गार्ड और मैदानी कर्मचारी आज तक नगर के प्रभावित वार्डों का निरीक्षण करने, भालुओं के फुट प्रिंट्स लेने नहीं पहुंचे हैं। इसे लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखी जा रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर भालुओं ने किसी व्यक्ति पर हमला कर दिया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? अगर आत्मरक्षा के लिए लोग भालुओं पर हमला कर देंगे, तो वन विभाग कार्रवाई करने में जरा भी देर नहीं करेगा।

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