छग मंडी बोर्ड में सज गई दलाली की मंडी, सहायक संचालक पर बेजा वसूली का आरोप



रायपुर। एक ओर जहां भाजपा के टॉप लीडर पंडित जवाहर लाल नेहरू की कमियां और उनके कार्यकाल की कथित नाकामियां गिनाते थकते नहीं हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन सरकार में एक नेहरू प्रशासनिक कुशासन का उदाहरण पेश कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन के मंडी बोर्ड में एक अधिकारी नेहरू की तरह रोल निभाते हुए साय के सुशासन पर बट्टा लगा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड मुख्यालय दलाली का अड्डा बन गया है। दलाली निचले स्तर के अधिकारी या आम कर्मचारी नहीं खा रहे हैं, बल्कि बोर्ड के एक बड़े अधिकारी यह हरकत कर रहे हैं। भाजपा के नेता जहां पं. नेहरू की खामियां और नाकामियां गिना कर कांग्रेस की खिल्ली उड़ाते रहते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड के नेहरू तो सीधे मुख्यमंत्री साय के सुशासन की खिल्ली उड़ा रहे हैं। सहायक संचालक स्तर के ये अधिकारी बिना किसी वजह के अपने मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन रोक देते हैं, बेतुकी दलील देते हैं कि वेतन भुगतान में कानूनी अड़चन है, सेवा सत्कार करो तभी वेतन मिलेगा। इस सहायक संचालक पर आरोप है कि वे मातहत अधिकारियों को यह कहते हुए प्रताड़ित करते हैं कि तुम लोग फील्ड में खूब कमाई कर रहे हो, मुझे भी उसमें से कमीशन दो। यही कुंठा पाले बैठे सहायक संचालक वेतन रोक कर अधिकारी कर्मचारियों को टार्चर करते हैं। एक बड़े अधिकारी का यह कृत्य कर्मचारियों के शोषण की श्रेणी में आता है। जानकारी के अनुसार मंडी बोर्ड मुख्यालय में पदस्थ सहायक संचालक जिन्हें लोग नेहरूजी के नाम से जानते हैं, वे अपने नाम के अनुरूप ही बीजेपी शासनकाल में सुशासन को बदनाम कर अपने ही कर्मचारियों से काम के एवज में भुगतान देने की मांग करते हैं। बताते हैं कि मामूली पद से इस विभाग में आए नेहरू जी ने गांधी जी का तिलस्म दिखा दिखा कर इस ओहदे तक पहुंचे हैं। मगर उनके हृदय में सुशासन सरकार की छवि अब तक नहीं आ पाई है। उनका कहना है कि मैं नेहरू का लाल बनकर ही बीजेपी शासन काल में कार्य करूंगा।

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