धर्म स्वातंत्रय विधेयक का ईसाई समुदाय ने किया विरोध
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पारित धर्म स्वातंत्रया अधिनियम 2026 के विरोध में ईसाई एकता मंच बस्तर संभाग द्वारा जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में धरना प्रदर्शन कर रैली निकाली गई। रैली शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई गुजरी। हजारों की संख्या में मसीही समुदाय के लोग रैली में शामिल हुए।
रैली कमिश्नरेट पहुंची, जहां राज्यपाल, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के नाम संभाग आयुक्त बस्तर संभाग को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि यह अधिनियम गैर संवैधानिक है। अधिनियम भारतीय संविधान द्वारा प्रदत अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों, विशेषकर अनुच्छेद 14, 19, 21 एवं 25 से 28 तक के प्रावधानों के बीच प्रत्यक्ष टकराव उत्पन्न करता है। यह अधिनियम संविधान में वर्णित धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करता है तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत धार्मिक प्रचार को अपराध की श्रेणी में लाता है। निजता एवं समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। अधिनियम समान अपराध के लिए असमान दंड देकर अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रश्न उठाता है।
यह अधिनियम धार्मिक अल्पसंख्यकों के संस्थानों पर अत्यधिक प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाता है। यह सभी प्रावधान नागरिकों के निजी जीवन, आस्था और अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता में विघ्न पैदा करता है।
अधिनियम में सामान्य रूप से धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा 5 लाख रु.से लेकर 25 लाख रुपए तक जुर्माना से दंडित किए जाने का प्रावधान है। इस अधिनियम के तहत सभी धाराओं में अपराध को गैर जमानती अपराध बनाकर एक ही श्रेणी में रखा गया है। विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रया अधिनियम 2026 ध्वनि मत से पारित होने के उपरांत वर्तमान में राज्यपाल से हस्ताक्षरित होकर राजपत्र में आने के लिए लंबित है। कहा गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पहले से ही मध्यप्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 का कानून छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रदेश पुनर्गठन के पहले यथावत लागू है, जिसके अंतर्गत छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण को रोकने का प्रावधान है। विगत कुछ वर्षों से इस अधिनियम का व्यापक दुरुपयोग देखा जा रहा है। धार्मिक अल्पसंख्यकों को विशेष कर ईसाई समुदाय के विरुद्ध निराधार आरोप एवं गिरफ्तारियां हो रही हैं। धार्मिक स्थलों पर प्रतिबंध, सामाजिक बहिष्कार, अंतिम संस्कार में रोकने के लिए बल प्रयोग सहित अनेक हिंसक घटनाएं होती आ रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा धर्मांतरण संविधान में प्रदत मौलिक अधिकारों का अनुसरण करते हुए किया जाता रहा है। छत्तीसगढ़ के किसी भी घटना ने सत्र न्यायालय या छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में आज पर्यंत एक भी प्रकरण में किसी व्यक्ति के विरुद्ध छल, बल या प्रलोभन से अवैध धर्मांतरण कराए जाने का मामला प्रमाणित नहीं हुआ है।
2026 का विधेयक पुराने अधिनियम को और कठोर बनाते हुए पारित किया गया है। इस अधिनियम में पुलिस और प्रशासन की शक्तियों को अत्यधिक बढ़ाने वाला है, जिसके तहत इस अधिनियम को किसी एक समाज के विरोध में दुरुपयोग की संभावना बढ़ने की आशंका है। इस अधिनियम में विडंबना यह है कि धर्मांतरण की झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है, जो कि पूर्वाग्रह को उजागर करते हुए एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह है। इसलिए धर्म स्वातंत्रया अधिनियम 2026 को तत्काल वापस लिया जाए।
