साधारण जार को RO सिस्टम बताकर 40 हजार का भुगतान!
-अर्जुन झा-
बकावंड। विकासखंड के सरपंच सचिव भ्रष्टाचार के मामले में अजब गजब कारनामे कर डालते हैं। ऐसा ही भ्रष्टाचार का एक संगीन मामला सामने आया है, जिसमें पानी के साधारण से जार को आर ओ सिस्टम बताकर पूरे 40 हजार रुपए का भुगतान दर्शाया गया है। इस जार की कीमत बमुश्किल 200 रुपए ही होगी।

यह मामला वाकई गंभीर है और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। बकावंड जनपद की ग्राम पंचायत गोटीगुड़ा में 15वें वित्त आयोग की राशि का ऐसा दुरूपयोग भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा कर रहा है। ग्राम पंचायत गोटीगुड़ा के पंचायत कार्यालय में वाटर फिल्टर सिस्टम स्थापना के नाम पर 15वें वित्त आयोग मद से किसी नीलांबर सेठिया नामक व्यक्ति को पूरे 40 हजार रुपए का भुगतान करना दर्शा कर राशि आहरित की गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि वाटर फिल्टर के नाम पर एक साधारण जार को एक टेबल पर रखा गया है। इस जार की कीमत बड़ी मुश्किल से दो-तीन सौ रुपए ही होगी। यह सीधे तौर पर सरकारी धन का गबन है।
इस मामले में पंचायत सचिव कमलोचन बघेल का यह कहना कि ऐसा काम नहीं करेंगे तो पंचायत कैसे चलेगी। यह कथन भ्रष्टाचार को स्वीकार करने जैसा है।यह पंचायती राज अधिनियम के तहत पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। 15वें वित्त की राशि का उपयोग गांव के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए किया जाना चाहिए, न कि हेराफेरी के लिए।
मामले में जनपद सीईओ ने जांच का आश्वासन दिया है। यदि जांच में बिल और भौतिक सत्यापन में अंतर पाया जाता है, तो सचिव और सरपंच पर कार्रवाई होगी। दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों से राशि की वसूली की जा सकती है और सचिव को निलंबित भी किया जा सकता। वहीं छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम के तहत अनियमितता पाए जाने सचिव को पद से हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है।
ग्रामीण इस मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर बस्तर या जिला पंचायत सीईओ के पास सकते हैं, ताकि जनपद स्तर पर मामले को दबाया न जा सके।
