“कांग्रेस महिला आरक्षण के समर्थन में थी और है”- विक्रम मंडावी
बीजापुर :- जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश की महिलाओं के साथ लगातार भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। कांग्रेस पार्टी महिलाओं के अधिकार, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है। महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की कांग्रेस की स्पष्ट और दृढ़ इच्छाशक्ति उसके विचारों और कार्यों में साफ झलकती है।
प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि भाजपा निरंतर भ्रम फैला रही है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, इसलिए बिल पास नहीं हो सका। यह सरासर झूठ है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (106वां संविधान संशोधन) संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और यह कानून बन चुका है।
विधायक विक्रम मंडावी ने स्पष्ट किया कि 16 अप्रैल 2026 को भाजपा सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण से संबंधित नहीं था। भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल पास कराना चाहती थी।
इस विधेयक में
1- लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव (राज्यों के लिए 815 तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें)।
2- परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रावधान।
3- पुदुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। आदि प्रस्तावित मुख्य प्रावधान थे।
विधायक विक्रम मंडावी ने विधेयक के पारित न होने का कारण बताते हुए कहा कि देश के कई राज्यों, विशेषकर दक्षिणी राज्यों को इस परिसीमन बिल पर आपत्ति थी। भाजपा आरक्षण के नाम पर परिसीमन बिल पास कराना चाहती थी। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती है, जबकि 2026-27 की जनगणना शुरू हो चुकी है और सरकार ने जाति जनगणना की भी बात कही है। ऐसे में नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं किया जा रहा?
उन्होंने पूछा कि यदि सरकार महिला आरक्षण को तुरंत लागू करना चाहती है तो परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा? कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार हैं।
सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी, लेकिन उसने ऐसा क्यों नहीं किया? वर्तमान कानून के अनुसार यह आरक्षण 2036 से प्रभावी होगा, जबकि संशोधन से इसे तुरंत लागू किया जा सकता था।
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि भाजपा की असली मंशा महिला आरक्षण की नहीं, बल्कि अपने मनमाफिक तरीके से सीटों का परिसीमन करने की थी, जो विपक्षी दलों की एकजुटता के कारण सफल नहीं हो सका।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक है। राजीव गांधी ने 1989 में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने का विधेयक पेश किया था। बाद में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने इसे कानून बना दिया। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का विधेयक डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में लाया गया, जो राज्यसभा में पारित भी हुआ। कांग्रेस के प्रयासों से आज देशभर में पंचायतों और स्थानीय निकायों में 15 लाख से अधिक महिलाएं निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा का सीटों के परिसीमन का षड्यंत्र विफल हो गया है, इसलिए अब वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है। देश की महिलाएं भाजपा के इस चाल-चरित्र को समझ चुकी हैं और उसके भ्रमजाल में नहीं फंसेंगी।
प्रेस वार्ता के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालू राठौर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, जिला पंचायत सदस्य नीना रावतिया उद्दे, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश कारम, जिला कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राजेश जैन, महामंत्री जितेंद्र हेमला, पार्षद बेनहूर रावतिया, पुरुषोत्तम सल्लूर, संतोष गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।
