किसानों को समय पर खाद बीज ऋण और पेट्रोल डीज़ल की किल्लत दूर कर संसाधनों की सुलभ व्यवस्था कराए सरकार – सीपीआई
बीजापुर – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद् बीजापुर ने दिनाँक 12/06/2026 को पांच सूत्रीय मांगों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा । सीपीआई ने मुख्यता अपनी माँग पत्र में किसानों की बढ़ती समस्या को दर्शाते हुए उल्लेखित किया है कि, वर्तमान परिस्थिति में देश में ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। डीज़ल पेट्रोल और गैस की आपूर्ति ने आम जनजीवन को अस्त व्यस्थ कर दिया है। जिसमें मोदी सरकार ने साम्राज्यवादी ताकतों के सामने घुटने टेके हुए हैं।जिस वजह से तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि की जा रही है महंगाई चरम पर पहुंच गई है।

सीपीआई की प्रमुख मांगो में
. किसानों को समय पर डीज़ल पेट्रोल आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए। ताकि कृषि कार्य में कोई बाधा न हो सके।
. किसानों को समय पर धान बीज खाद ऋण की सुलभ व्यवस्था किया जाए।
. किसानों की बैंकिंग व्यवस्था कॉपरेटिव बैंक के अलावा और बैंकों में भी व्यवस्था कराई जाए ताकि आनेवाले दिनों में किसानों को राशि आहरण करने में असुविधा का सामना न करना पड़े। ऐसे पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सीपीआई जिला कमेटी बीजापुर ने ज्ञापन पत्र सौंपा।
वही भाकपा जिला सचिव कमलेश झाड़ी ने पत्रकारों से चर्चा में कहा है कि कम्युनिस्ट पार्टी देश के ग़रीब मज़दूर किसान की होने वाली समस्याओ के लिए संघर्ष करने को कटिबद्ध है। वहीं उन्होंने कहा है कि पूँजीवादी साम्राज्यवादी उद्योगपतियों के इसारे पर काम करने वाले कार्पोरेट पिट्टू मोदी सरकार हर मोर्चे पर विफल है। देश में आर्थिक लूट चल रही है।
ग़रीब वर्ग और मध्यम वर्ग का जीवन दुभर हो चुका है। महंगाई बेरोजगारी ग़रीबी बढ़ रही है। शिक्षा स्वास्थ का निजीकरण हो रहा है। भाजपा आरएसएस की फासीवाद मोदी सरकार साम्राज्यवादी ताकतों को बढ़ाने और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली सरकार है आने वाले दिनों में देश की हालात को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा से इनकार नही किया जा सकता जिसका सबसे ज़्यादा असर किसान मज़दूर और मध्यम वर्ग को पड़ेगा देश की अर्थव्यवस्था नीचे गिर जाएगी इस तरह के कई आरोप लगाया गया है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान भाकपा जिला सचिव कमलेश झाड़ी, सह सचिव राजू तेलम, आयतू तेलम, कोवा राम हेमला, जेम्स कुड़ियाम, संजय झाड़ी, सुकलु, रिंकु, रामबती, नूतन सहित कार्यकर्ता मजूद रहे।
