पूरे परिवार को उजाड़ डाला नक्सलियों ने, पहले पिता, फिर सरपंच पुत्र को मार डाला, छूटी विदेश में छोटे भाई की डॉक्टरी की पढ़ाई
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। नक्सलियों ने बस्तर के आदिवासियों को जो जख्म दिए हैं, वो जख्म शायद ही कभी भर पाएं। नक्सलियों ने बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में आदिवासी गोटा परिवार को पूरी तरह उजाड़ कर रख दिया है। घृणित विचारधारा वाले माओवादियों ने पहले गोटा परिवार के मुखिया पिता को मौत के घाट उतार दिया, फिर कुछ वर्ष बाद परिवार के बड़े बेटे पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर घायल इस बेटे ने करीब पौने तीन साल बाद ईलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस त्रासदी ने गोटा परिवार के छोटे बेटे के डॉक्टर बनने के सपने को कुचल कर रख दिया।
बीजापुर जिले के ग्राम फरसेगढ़ के पूर्व सरपंच महेश कुमार गोटा का सोमवार को दोपहर जगदलपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे फरसेगढ़ निवासी स्व. चिन्नाराम गोटा के पुत्र थे। अगस्त 2023 में नक्सलियों द्वारा महेश गोटा का घर से अपहरण कर लिया गया था। इस दौरान नक्सलियों ने रस्सी से गला घोंटकर उनकी हत्या की कोशिश की थी। उस वक्त किसी के आने आहट से नक्सली उन्हें अधमरा छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद परिजनों द्वारा खोजबीन के दौरान जंगल में महेश गोटा अचेत अवस्था में मिले। परिजनों के आग्रह पर तत्काल बेहतर इलाज के लिए रायपुर से उन्हें दिल्ली भेजा गया था। वे लंबे समय से कोमा में रहकर जिंदगी और मौत के बीच लड़ाई लड़ रहे थे। 2 साल 9 माह तक चले ईलाज के बाद 15 जून सोमवार को उन्होंने जगदलपुर में अंतिम सांस ली। महेश कुमार गोटा के निधन पर परिजनों, ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि देते हुए उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने की प्रार्थना ईश्वर से की। विदित हो कि महेश गोटा के पिता चिन्नाराम गोटा की भी नक्सलियों ने 2013 में गोली मारकर हत्या कर दी थी। सलवा जुडूम के बाद से गोटा परिवार नक्सलियों के निशाने पर रहा है। महेश गोटा के छोटे भाई प्रकाश गोटा जो विदेश में डाक्टरी पढ़ाई कर रहे थे, परिजनों के नक्सली निशाने के बाद वे अपनी पढ़ाई भी पूरी करने असमर्थ रहे। वर्तमान में फरसेगढ़ की सरपंच महेश गोटा की पत्नी हैं।
