स्थानीय बोली भाषा में पढ़ाई करेंगे बस्तर के बच्चे



जगदलपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बस्तर के बच्चों को स्थानीय बोली भाषाओं में शिक्षा देने के लिए डाइट बस्तर में मंगलवार से दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए तैयार हल्बी, भतरी और गोंडी भाषा की पठन सामग्री को इस कार्यशाला में अंतिम रूप दिया जाएगा।
एफएलएन प्रभारी बेनूराम मौर्य के मार्गदर्शन में शुरू हुई कार्यशाला में तीनों भाषाओं के विशेषज्ञ शिक्षक सामग्री की प्रूफ रीडिंग और भाषागत सुधार कर रहे हैं। श्री मौर्य ने कहा कि अपनी बोली भाषा में पढ़ने से बच्चों की समझ और अभिव्यक्ति बेहतर होती है। इसलिए सामग्री को सरल, रोचक और स्थानीय संस्कृति से जोड़कर तैयार किया जा रहा है। विशेषज्ञ प्रत्येक पाठ, कहानी और चित्रों की प्रासंगिकता पर काम कर रहे हैं ताकि बच्चे खुद को किताबों से जोड़ सकें। हल्बी भाषा के लिए कृष्णा सिंह ठाकुर, हिरेंद्र देवांगन, विजय कश्यप, भतरी के लिए नेहुरलाल कश्यप, महेंद्र पांडेय, मोहित पांडेय और गोंडी के लिए महेश पोयाम, बुधराम कर्मा, भारत कुरुद कार्यशाला में शामिल हैं। एलएलएफ बस्तर से डीएसी एवं बीएसी तकनीकी सहयोग दे रहे हैं।समीक्षा के बाद परिष्कृत सामग्री को मुद्रण हेतु भेजा जाएगा। जल्द ही यह सामग्री प्राथमिक शालाओं में पहुंचा दी जाएगी। इससे बस्तर के हजारों बच्चों को मातृभाषा में पढ़ने का अवसर मिलेगा। हिंदी माध्यम से पढ़ाई शुरू करने पर इन्हें होने वाली दिक्कत दूर होगी और फाउंडेशनल लिटरेसी मजबूत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक इस पहल से ड्रॉपआउट दर घटेगी और स्थानीय भाषाओं का संरक्षण भी होगा।

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