बस्तर में 89 करोड़ का धान खरीदी घाेटाला: उमाशंकर शुक्ला



जगदलपुर। प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने भाजपा की विष्णदेव सरकार में बस्तर संभाग में समर्थन मूल्य पर हुई धान खरीदी के बाद 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपए के घाेटाले का आराेप लगाते हुए कहा कि भाजपा की सरकार 89 करोड़ के धान खरीदी घाेटाले से बचने के लिए समितियों के प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों पर घाेटाले का ठीकरा फाेड़कर समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीदी प्रभारियों से वसूली करने में जुट गई है।
श्री शुक्ला ने कहा कि भाजपा की विष्णदेव सरकार काे यह बताना पड़ेगा कि बस्तर के किसानाें का 89 करोड़ के धान खरीदी घाेटाले में किसकाे कितना हिस्सा मिला। समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीदी प्रभारियों की आड़ में 89 करोड़ के घाेटाले पर लीपापाेती करने नही दिया जाएगा। पं. शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2025-26 में बस्तर संभाग के 7 जिलों के 382 धान खरीदी केंद्रों में हुई खरीदी के भौतिक सत्यापन में कांकेर से 13,281 मिट्रिक टन, कोंडागांव से 6,642 मिट्रिक टन, बस्तर से 4,687 मिट्रिक टन, बीजापुर से 2,131 मिट्रिक टन, सुकमा से 1,501 मिट्रिक टन सहित कुल 28 हजार 243 मिट्रिक टन धान कम पाया गया है। इस धान की कीमत लगभग 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपए आंकी गई है। इस धान खरीदी घाेटाले की तस्दीक करते हुए जगदलपुर जिला सहकारी बैंक के अतिरिक्त प्रबंधक एस. रजा के अनुसार बस्तर संभाग के 7 जिलों में धान बेचने के लिए 2 लाख 72 हजार 647 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 2 लाख 28 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा। पूरे संभाग में कुल 13 लाख 74 हजार 383 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। खरीदी के बाद मिलर्स द्वारा 13 लाख 46 हजार 138 मिट्रिक टन धान का उठाव किया गया। इसके बाद सभी खरीदी केंद्रों का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें करीब 28 हजार 243 मिट्रिक टन धान का शॉर्टेज सामने आया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमाशंकर शुक्ला ने कहा खुद को मिली जानकारी के हवाले से कहा है कि 89 करोड़ के धान खरीदी घाेटाले की वसूली के लिए संबंधित समितियों को नोटिस जारी कर समिति प्रबंधकों को राशि जमा करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीदी प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है।

समिति प्रबंधकों का कथन
वहीं समिति प्रबंधकों का कहना है कि कई मामलों में निर्धारित समय पर मार्कफेड द्वारा धान का उठाव नहीं किए जाने के कारण खरीदी केंद्रों में धान लंबे समय तक पड़ा रहा। ऐसे में शॉर्टेज का पूरा खामियाजा समिति प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों पर डालना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि वेयर हाउस में चांवल के शॉर्टेज पर सूखत का प्रावधान है तो धान खरीदी के दौरान ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है? समिति प्रबंधकों का आरोप है कि समय पर धान का उठाव नहीं होने और संग्रहण केंद्रों में धान के खराब होने की स्थिति का असर अब खरीदी समितियों पर डाला जा रहा है।

थोथी है यह दलील
पं. उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीदी प्रभारियों के बचाव में पेश की जा रही दलील काे भी यदि सच मान लिया जाए ताे खरीदी केंद्रों में धान लंबे समय तक पड़े रहने से धान के खराब होने एवं सूखत का भी आंकलन करने पर 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान की कमी आना संभव ही नही है। यह बस्तर संभाग के किसानाें के धान खरीदी में बड़ा घाेटाले किए जाने की ओर स्पष्ट संकेत देता है, जिसकी परदर्शिता के साथ जांच कर 89 करोड़ के धान खरीदी घाेटाले की तह तक पंहुचना आवश्यक है।

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