एनएमडीसी पर वादे से मुकरने का आरोप, फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
जगदलपुर। नगरनार स्टील प्लांट से प्रभावित ग्राम पंचायतों के लोगों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एनएमडीसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 22 सितंबर से प्लांट के गेट नंबर-1 के सामने अनिश्चितकालीन धरना और प्रदर्शन शुरू किया गया था, जो आज हुई त्रिपक्षीय वार्ता के बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2001 में प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान प्रभावित क्षेत्रों के विकास को लेकर कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन लंबे समय बाद भी कई मांगें पूरी नहीं हुई हैं।आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी ओर से पिछले करीब एक वर्ष से एनएमडीसी प्रबंधन को पत्राचार के माध्यम से समस्याओं और मांगों की जानकारी दी जा रही थी। मांग-पत्र के मुताबिक सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण अब प्रभावित पंचायतों के लोगों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। सबसे प्रमुख मुद्दों में कोपागुड़ा खुटपदर क्षेत्र में प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के लिए 22 एकड़ जमीन हस्तांतरित होने के बावजूद करीब 18 वर्ष बाद भी अस्पताल की नींव तक नहीं रखी जा सकी है। ग्रामीण इस मुद्दे पर प्रबंधन से स्पष्ट जवाब और समयबद्ध कार्रवाई चाहते हैं। रोजगार को लेकर भी प्रभावित परिवारों की नाराजगी सामने आई है। मांग की गई है कि एनएमडीसी स्टील प्लांट में स्थानीय भू-प्रभावित किसानों और क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के लिए नागरनार आईटीआई में राजमिस्त्री जैसे उपयोगी ट्रेड के साथ इलेक्ट्रिशियन, फिटर और मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण शुरू करने की मांग रखी गई है। ग्रामीणों ने जगदलपुर-नागरनार मार्ग पर बढ़ते यातायात और दुर्घटनाओं को देखते हुए सड़क को सिक्स-लेन करने की मांग भी उठाई है। प्रभावित गांवों में शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क और खेल सुविधाओं के विकास को तेज करने की मांग की गई है। स्थानीय सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर भी मांग रखी गई है। मड़ई-मेला, होली और अन्य पारंपरिक कार्यक्रमों के लिए मिलने वाली वार्षिक सहयोग राशि में बढ़ोतरी की मांग की गई है। वहीं प्लांट से निकलने वाले दूषित पानी से प्रभावित फसलों के उचित मुआवजे और जल शोधन की व्यवस्था की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।रोजगार में स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अधिकतम आयु सीमा 33 से बढ़ाकर 40 वर्ष करने की मांग भी की गई है। साथ ही वर्ष 2010 में चिन्हांकित 1152 प्रभावित किसानों में से शेष 314 किसानों को एनएमडीसी में रोजगार देने और तब तक संबंधित परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग सामने रखी गई है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्र के आसपास स्थित मारकेल-1, मारकेल-2, खम्हारगांव, गयरापंडसुद और कावपाल को भी आधिकारिक रूप से भू-प्रभावित ग्राम पंचायत का दर्जा देने की मांग की गई है। आंदोलनकारियों ने इन सभी मांगों पर एनeमडीसी प्रबंधन से स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग की है। अब निगाह इस बात पर है कि अनिश्चितकालीन धरने के बीच प्रबंधन की ओर से प्रभावित पंचायतों के प्रतिनिधियों से बातचीत और मांगों के समाधान के लिए क्या पहल की जाती है।
प्रशासन ने किया हस्तक्षेप
एननएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट के खिलाफ जारी आंदोलन प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद आज स्थगित कर दिया गया। एसडीएम जगदलपुर मनीष वर्मा, तहसीलदार श्री गुप्ता, और एस बाबजी और एननएमडीसी के पर्सनल अधिकारी ने आंदोलन स्थल पर पहुंच कर हड़ताली नेताओं के साथ सार्थक चर्चा के की। आंदोलनकारी ग्रामीणों के मुताबिक प्रबंधन ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पीटल न खुल पाने की स्थिति में गंभीर मरीजों को विशाखापत्तनम, रायपुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने, स्थानीय बेरोजगारों की भर्ती सरपंच के हस्ताक्षर व सील मोहर के आधार पर करने, दूषित जल के निस्तारण के लिए पॉन्ड बनाने और रिसाईकलिंग करने, आईटीआई में कोपा, फिटर, इंजिनिरिंग जैसे ट्रेड में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण दिलाने, गांवों के सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सहयोग राशि बढ़ाने समेत कुछ अन्य मुद्दों पर सहमति जताई।इसके बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई। ग्रामीणों ने कहा है कि 15 दिनों में परिणाम नजर नहीं आए, तो आंदोलन फिर शुरू कर दिया जाएगा।
