झीरम कांड में बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में की अपील

जगदलपुर।
झीरम घाटी मामले में एनआईए कोर्ट की ओर से 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दोषियों की और से अधिवक्ता ने अपील दायर की है. अब हाई कोर्ट द्वारा नोटिस जारी करने की प्रतीक्षा की जा रही है.
बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने बताया कि दोषियों के परिजनों से चर्चा के बाद अपील की अर्जी दायर की की गई.
झीरम घाटी हत्याकांड मामले में करीब 13 साल बाद अदालत ने सजा का ऐलान किया था। जिसमें विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने बुधवार को सजा पर फैसला सुनाया था। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए सभी 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई. 5 सितंबर को अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के निर्धारण के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई थी। बुधवार को अदालत ने सभी दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। मामले में बचाव पक्ष में हाई कोर्ट में अपील कर ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए मृत्युदंड के फैसले को चुनौती दी है.

इन 10 आरोपियों को मिली मृत्युदंड की सजा
इस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। सभी आरोपी वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद हैं। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी, जिसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।

प्रमिला के पिता ने भी जारी किया पत्र
झीरम मामले में अभियुक्त में एक प्रमिला करती के पिता सोनू कड़ती ने राष्ट्रपति समेत हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को पत्र जारी कर जीवनदान की अपील की है. ज्ञात हो कि
25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ काफिले में माओवादियों ने हमला किया था.
जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी वहीं 38 घायल हुए थे।

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