नक्सलवाद खत्म होने के सरकारी दावे के बीच दल्लीराजहरा में भाजपा नेता को पुलिस सुरक्षा पर कांग्रेस ने उठाए सवाल



दल्ली राजहरा। केंद्र एवं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त किए जाने तथा बस्तर में नक्सली हिंसा के दौर के समाप्त होने के दावे के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आ रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था और बाद में सरकार की ओर से देश तथा छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद-मुक्त किए जाने की घोषणा की गई।इसी संदर्भ में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रतिराम कोसमा ने दल्ली दल्ली राजहरा में एक भाजपा जिला पदाधिकारी को लगातार उपलब्ध कराई जा रही पुलिस सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन एवं शासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रतिराम कोसमा ने कहा कि यदि सरकार के अनुसार छत्तीसगढ़ में नक्सल गतिविधियों का अंत हो चुका है और राज्य शांति की ओर बढ़ चुका है, तो उस व्यक्ति को उपलब्ध कराई जा रही पुलिस सुरक्षा के पीछे सुरक्षा संबंधी वास्तविक और वर्तमान आधार क्या है, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।श्री कोसमा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार फरवरी 2026 में छत्तीसगढ़ के छह जिले—बीजापुर, दंतेवाड़ा, गरियाबंद, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों की सूची में थे, जबकि बालोद जिला उस सूची में शामिल नहीं था। ऐसे में दल्ली राजहरा जैसे क्षेत्र में किसी राजनीतिक दल के ऐसे पदाधिकारी को लंबे समय तक सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का आधार क्या है, यह जानना आम नागरिकों का भी अधिकार है। रतिराम कोसमा ने कहा कि जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के दल्ली राजहरा नगर पालिका के पार्षद, नगर पालिका उपाध्यक्ष तथा भाजपा के कुछ जिम्मेदार नेताओं द्वारा पुलिस अधीक्षक, बालोद को लिखित रूप से संबंधित भाजपा जिला पदाधिकारी की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल को हटाने की मांग की जा चुकी है। यदि ऐसा पत्र पुलिस प्रशासन को प्राप्त हुआ है, तो उसके बाद भी सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने का निर्णय किन परिस्थितियों और किस सुरक्षा आकलन के आधार पर लिया गया, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।श्री कोसमा ने यह भी कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा को लेकर वास्तव में कोई गंभीर एवं विशिष्ट खतरा है, तो पुलिस प्रशासन को उसका स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन करना चाहिए और उसी के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। लेकिन यदि कोई विशेष खतरा मौजूद नहीं है, तो सरकारी संसाधनों का उपयोग राजनीतिक पदाधिकारी की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए किए जाने पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठेंगे। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी गैर-संवैधानिक अथवा गैर-प्रशासनिक पद पर आसीन व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है, तो सुरक्षा के समान मापदंड कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों के जिम्मेदार पदाधिकारियों पर भी लागू होने चाहिए। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी दल्ली राजहरा की मांग है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता बरते और स्पष्ट करे कि संबंधित व्यक्ति को किस सुरक्षा श्रेणी, किस खतरे के आकलन तथा किस प्रशासनिक आदेश के आधार पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही सुरक्षा उपलब्ध कराने में होने वाले सरकारी व्यय एवं सुरक्षा बल की तैनाती के औचित्य की भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। रतिराम कोसमा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसी भी वास्तविक सुरक्षा खतरे को नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं है। यदि किसी नागरिक या जनप्रतिनिधि को वास्तविक खतरा है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था निष्पक्ष, पारदर्शी और समान मापदंडों पर आधारित होनी चाहिए, न कि राजनीतिक पद या प्रभाव के आधार पर। उन्होंने पुलिस प्रशासन से यह भी मांग की कि यदि संबंधित व्यक्ति की सुरक्षा को लेकर कोई विशिष्ट खुफिया या सुरक्षा इनपुट उपलब्ध है, तो उसकी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक किए बिना कम-से-कम इतना स्पष्ट किया जाए कि सुरक्षा जारी रखने का प्रशासनिक आधार क्या है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी दल्ली राजहरा का स्पष्ट मत है कि कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार का राजनीतिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। शासन को सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक और पारदर्शी जवाब देना चाहिए।

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