राहुल गांधी को निर्वाचन आयोग और देश से भी माफी मांगनी चाहिए : संजय पाण्डेय

जगदलपुर। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जगदलपुर महापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हालिया संयुक्त बयान ने SIR से जुड़े निर्णयों में आयोग के तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति को स्पष्ट कर दिया है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा आयोग में कथित मतभेदों को लेकर किए जा रहे दावों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

श्री पाण्डेय ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर बिना पर्याप्त तथ्य के आरोप लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को निर्वाचन आयोग से सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होने चाहिए। निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस नेतृत्व को अपने पूर्व दावों की समीक्षा करनी चाहिए और यदि उसके आरोप तथ्यहीन साबित होते हैं तो देश और संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगनी चाहिए।

SIR पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भी महत्वपूर्ण

महापौर संजय पाण्डेय ने कहा कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय देते हुए निर्वाचन आयोग के इस अभ्यास की वैधानिक शक्ति को स्वीकार किया था। न्यायालय ने SIR को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि—

“जब देश की सर्वोच्च अदालत किसी प्रक्रिया की वैधानिकता पर निर्णय दे चुकी हो और निर्वाचन आयोग स्वयं अपने निर्णयों की प्रक्रिया को स्पष्ट कर चुका हो, तब राजनीतिक आरोपों को तथ्य और प्रमाण की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।”

चुनाव हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं

श्री पाण्डेय ने कहा कि चुनाव में हार या जीत लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है। किसी राजनीतिक दल को चुनावी परिणामों से असहमति हो सकती है और वह कानूनी एवं संवैधानिक माध्यमों से सवाल उठा सकता है, लेकिन हर चुनाव के बाद EVM, निर्वाचन आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि इसी संवैधानिक चुनावी व्यवस्था के माध्यम से सदन में पहुंचे हैं। इसलिए व्यवस्था में कमियों की शिकायत हो तो उसका समाधान संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के भीतर किया जाना चाहिए।

“लोकतंत्र में आरोप नहीं, प्रमाण महत्वपूर्ण हैं”

महापौर ने कहा—

“लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं है। लोकतंत्र का आधार है—मतदाता का विश्वास, निष्पक्ष प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान। राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन देश की संस्थाओं पर लगाए गए प्रत्येक आरोप के साथ ठोस तथ्य और प्रमाण भी होने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चाहिए कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण और न्यायालय के निर्णयों को गंभीरता से देखे।

संजय पाण्डेय ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को देश की जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे ठोस प्रमाण क्या हैं। यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो उन्हें निर्वाचन आयोग तथा देश से माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि—

“देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी एक दल की नहीं, 140 करोड़ देशवासियों की व्यवस्था है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—सभी की जिम्मेदारी है कि संविधान, चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करें।”

— संजय पाण्डेय
महापौर, जगदलपुर

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