बकावंड पंचायत में लाखों के भुगतान पर सवाल, घेरे में तमाम बिल



बकावंड। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का हिसाब जनता तक पहुंचना जरूरी है। लेकिन बस्तर जिले के बकावंड जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बकावंड में पंचायत निधि से कराए गए निर्माण कार्यों और सामग्री खरीदी के भुगतान को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतानों और उपलब्ध बिलों की प्रतियों में दिखाई दे रहे अलग-अलग मदों पर खर्च में दर्शाई गई वैधता, सामग्री की वास्तविक आपूर्ति और निर्माण कार्यों की स्थिति की जांच की मांग को महत्त्वपूर्ण बना दिया है।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में सड़क मरम्मत के लिए 49 हजार रुपये का भुगतान जमाहार ठाकुर के नाम दर्ज है। संबंधित वाउचर संख्या की तारीख 11 सितंबर 2026 बताई गई है। इसी तरह पटेल पारा से स्कूल होते हुए रीशिंग घर तक सीसी सड़क निर्माण के नाम पर डीवी ट्रेडर्स को 93 हजार रुपये का भुगतान दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसके लिए वाउचर तारीख 8 सितंबर 2026 का बताय गया है। इन दोनों भुगतानों के संबंध में निर्माण की वास्तविक स्थिति, कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका और भुगतान अभिलेखों का मिलान कराया जाना जरूरी है।


सोलर पंप और टंकी में भी खेल
उपलब्ध दस्तावेजों में पॉवर इंजीनियरिंग, जगदलपुर के इनवॉइस क्रमांक 333, दिनांक 11 नवंबर 2025 में सोलर पंप की आपूर्ति एवं स्थापना के लिए 3 लाख 56 हजार रुपए दर्ज है। इसी फर्म के इनवॉइस क्रमांक 336, दिनांक 29 नवंबर 2025 में सोलर फोटोवोल्टिक पंप, 5,000 लीटर की पानी की टंकी और स्टील स्ट्रक्चर की स्थापना के नाम पर 3 लाख 57 हजार रुपये व्यय दर्शाया गया है। दोनों बिलों में सोलर पंप से संबंधित कार्यों का उल्लेख होने के कारण यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि ये दो अलग-अलग प्रोजेक्ट के काम हैं या इनमें कोई समानता है। दोनों भुगतानों की स्वीकृति, कार्यादेश, स्थापना स्थल, तकनीकी विवरण और संपत्ति रजिस्टर का मिलान होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध विवरण के आधार पर दोहरे भुगतान का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

निर्माण सामग्री से कंप्यूटर तक
दस्तावेजों में तरुण शर्मा हार्डवेयर, बकावंड में 2 अक्टूबर 2026 के बिल में निर्माण सामग्री के लिए 55,200 रुपये दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पावर इंजीनियरिंग के 20 दिसंबर 2025 के इनवॉइस क्रमांक 340 में टाइल्स और रेत के लिए 1 लाख 1 हजार 800 रुपए दर्शाए गए हैं। महेश इलेक्ट्रिकल्स, जगदलपुर के बिल क्रमांक 403 में विद्युत सामग्री के लिए लगभग 49,500 रुपये का उल्लेख है। डीबी ट्रेडर्स के बिल क्रमांक 990 में पाइप एवं अन्य सामग्री के लिए 17,880 रुपये दर्ज हैं। जेके स्पेशल कंस्ट्रक्शन एंड जनरल ऑर्डर सप्लायर के बिल क्रमांक 121, दिनांक 15 अक्टूबर 2025 में 120 मुरुम के लिए 60 हजार रुपये दर्शाए गए हैं। इसके अलावा बस्तर फ्लेक्स के बिल क्रमांक 209, दिनांक 22 जून 2026 में फ्लेक्स प्रिंटिंग के लिए 2,43,080 रुपये तथा नित्यासी एंटरप्राइजेज के 8 दिसंबर 2025 के टैक्स इनवॉइस में 5वीं रिजर्वायर सीपीयू के लिए 15,800 रुपये दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इन सभी मदों में संबंधित बिलों की वैधता, जीएसटी विवरण, सामग्री की मात्रा, वास्तविक आपूर्ति, भुगतान के बैंक रिकॉर्ड और पंचायत में सामग्री के उपयोग की जांच की मांग उठी है। बिलों पर जीएसटी नंबर या अन्य विवरणों की स्थिति को लेकर उठे सवालों का समाधान संबंधित कर अभिलेखों और मूल दस्तावेजों की जांच से ही संभव है।

ग्रामीणों के सामने हो ऑडिट
इस पूरे मामले में सार्वजनिक सोशल ऑडिट की मांग प्रमुखता से उठाई जा रही है। मांग है कि जांच केवल कार्यालयों में दस्तावेज देखकर पूरी न की जाए, बल्कि ग्रामीणों, सभी वार्ड पंचों और संबंधित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पंचायत के खर्चों का विवरण सार्वजनिक किया जाए। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के निर्माण कार्यों और सामग्री खरीदी का हिसाब प्रस्तुत करने, प्रत्येक भुगतान के मूल बिल, जीएसटी इनवॉइस, वाउचर, बैंक भुगतान विवरण और कैशबुक का मिलान कराने की मांग की जा रही है। साथ ही निर्माण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी अधिकारियों से भौतिक सत्यापन तथा माप पुस्तिका, तकनीकी प्राक्कलन, स्वीकृति आदेश और गुणवत्ता प्रमाणपत्र सार्वजनिक करने की मांग भी महत्वपूर्ण है। मांग की जा रही है कि यदि जांच में फर्जी बिल, एक ही कार्य के लिए दोहरा भुगतान, बिना वास्तविक कार्य के राशि आहरण या अन्य वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार राशि की वसूली और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए। जांच पूरी होने तक संबंधित अभिलेखों को सुरक्षित रखने की भी आवश्यकता है। फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों और भुगतान प्रविष्टियों के आधार पर लगाए जा रहे सवालों का अंतिम उत्तर निष्पक्ष जांच के बाद ही मिल सकेगा।ग्रामीण बोले कि ग्राम पंचायत की राशि ग्रामीणों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए होती है। ऐसे में सड़क, सोलर पंप, पानी की टंकी और सामग्री खरीदी पर हुए खर्च का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत बकावंड के भुगतान एवं निर्माण कार्यों की जांच कराते हैं या नहीं, और क्या ग्रामीणों को सार्वजनिक सोशल ऑडिट के माध्यम से अपने पंचायत के खर्चों की वास्तविक जानकारी मिल पाती है।

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