प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी  के स्वर्गीय पिता पर टिप्पणी कांग्रेस की हताशा और राजनीतिक संस्कारों के पतन का प्रतीक : जी. वेंकटेश्वर

जगदलपुर/बीजापुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री जी. वेंकटेश्वर ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के स्वर्गीय पिता के संबंध में की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे कांग्रेस की हताशा, वैचारिक दिवालियापन और गिरते राजनीतिक स्तर का परिचायक बताया है।

श्री वेंकटेश्वर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास, सुशासन, गरीब कल्याण और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए आयाम स्थापित कर रहा है। ऐसे में कांग्रेस के पास सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का तथ्यपूर्ण जवाब देने के बजाय यदि व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियों का सहारा ही बचा है, तो यह उसकी राजनीतिक बेचैनी और दिशाहीनता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि राजनीति में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन किसी के स्वर्गीय पिता को राजनीतिक निशाना बनाना न तो स्वस्थ लोकतंत्र की परंपरा है और न ही भारतीय संस्कृति के संस्कारों के अनुरूप है। वैचारिक मतभेद लोकतंत्र की शक्ति हैं, लेकिन उन मतभेदों को व्यक्त करने के लिए भाषा की मर्यादा और मानवीय संवेदनशीलता बनाए रखना प्रत्येक राजनीतिक नेता की जिम्मेदारी है।

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से देश अधिक गंभीरता, संयम और जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा करता है। सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा केवल राजनीतिक बयान देने से नहीं, बल्कि अपने शब्दों और व्यवहार से लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने से स्थापित होती है। प्रधानमंत्री के प्रति राजनीतिक विरोध रखते हुए उनके दिवंगत परिजन को टिप्पणी का विषय बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास अपमानजनक टिप्पणियों से नहीं, बल्कि स्पष्ट विचारों, जनसेवा, ठोस नीतियों और सकारात्मक विकल्पों से अर्जित किया जाता है। जब राजनीतिक विमर्श जनहित के मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत टिप्पणियों पर केंद्रित होने लगे, तब यह विपक्ष की रणनीति ही नहीं, उसकी राजनीतिक दिशा पर भी सवाल खड़े करता है।

श्री वेंकटेश्वर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित, गरीबों के कल्याण, विकास और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी है। भाजपा का विश्वास है कि राजनीतिक संघर्ष नीतियों, विचारों और कार्यों के आधार पर होना चाहिए। देश की जनता भी यही अपेक्षा करती है कि राजनीतिक दल बेरोजगारी, किसानों, युवाओं, गरीबों, विकास और राष्ट्रीय हित जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा करें, न कि ऐसे बयानों से राजनीतिक वातावरण को दूषित करें।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता और दिवंगत परिजनों के प्रति सम्मान हमारी सामाजिक चेतना का अभिन्न हिस्सा है। राजनीतिक विचारधाराओं में भिन्नता हो सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक सम्मान के विषय में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। कांग्रेस नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए कि उसकी राजनीतिक भाषा समाज में किस प्रकार का संदेश दे रही है।

जी. वेंकटेश्वर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मांग की कि वे अपनी टिप्पणी के संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें तथा यदि उनके शब्दों से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और उनके परिवार की गरिमा को ठेस पहुंची है, तो सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगें।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक हताशा में अपनी भाषा और व्यवहार का स्तर गिराने के बजाय सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन आलोचना और अपमान के बीच की सीमा को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

अंत में श्री वेंकटेश्वर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विरोध करना कांग्रेस का राजनीतिक निर्णय हो सकता है, लेकिन किसी के स्वर्गीय पिता के प्रति अमर्यादित टिप्पणी को राजनीतिक हथियार बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। देश की जनता को अपमानजनक बयानबाजी नहीं, बल्कि विकास, जवाबदेही और जनहित की राजनीति चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व को अपनी राजनीतिक भाषा पर आत्ममंथन कर सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का पालन करना चाहिए।

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