राष्ट्रपति के कार्यक्रम में रिटायर्ड अफसर की ड्यूटी!
जगदलपुर। राष्ट्रपति का हर कार्यक्रम देश की सर्वोच्च सुरक्षा प्रोटोकाल के दायरे में आता है। वहीं राष्ट्रपति के बस्तर प्रवास के दौरान उनके दो कार्यक्रमों में नायब तहसीलदार के पद से सेवानिवृत्त अधिकारी को प्रवेश की अनुमति दी जाने की खबर है। नियमतः किसी भी सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी की ड्यूटी राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में राष्ट्रपति के बस्तर वाले दोनों कार्यक्रमों में गंभीर प्रशासनिक चूक और प्रोटोकाल का उल्लंघन किया गया, जिसका जिम्मेदार कौन है? एक ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी को प्रवेश देकर सारे नियमों को दरकिनार किया गया जो रेलवे की जमीन मामले में दागी है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 23 अक्टूबरर को जगदलपुर प्रवास के दौरान दंतेश्वरी मंदिर पूजा अर्चना करने पहुंची थी। इसके बाद वह सिरहासार भवन में आयोजित विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार के रस्म में हिस्सा लेने पहुंची। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए सुरक्षा और आवागमन के विशेष प्रबंध किए गये थे। इन दोनों स्थलों पर सेवानिवृत्त अधिकारी की उपस्थिति रही है। इस कृत्य ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेवानिवृत्त अधिकारी अर्जुन श्रीवास्तव को बस्तर सांसद द्वारा दशहरा समिति के प्रमुख सलाहकार नियुक्त किए जाने की जानकारी मिली है। उक्त सेवानिवृत्त अधिकारी को किसकी अनुमति से राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति दी गई। सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले अधिकारी के पास उनकी सूची उपलब्ध थी या नहीं यह जाचं का विषय है।राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में सिरहासार भवन के अंदर सुरक्षा के दृष्टिकोण का हवाला देकर मीडिया का प्रवेश वर्जित किया गया था और मीडिया को पास के एक टेंट में स्थान दिया गया था, लेकिन उस सेवानिवृत्त अधिकारी को प्रवेश किस अफसर की सहमति से दी गई थी जो जांच का विषय है साथ ही साथ राष्ट्रपति के सुरक्षा का भी प्रश्न है। दशहरा समिति में अर्जुन श्रीवास्तव को विशेष सलाहकार नियुक्त किए जाने को लेकर समिति के सदस्यों के समक्ष किसी प्रकार से कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया है। समिति की बिना सहमति के सलाहकार नियुक्त किया जाना भी जांच का विषय है। पूर्व में उक्त अधिकारी का रेलवे के भूमि विवाद से गहरा नाता रहा है ऐसे में विवादित व्यक्ति को सलाहकार बनाया जाना दशहरा के सामग्री क्रय को लेकर भी चर्चा है। कानून के जानकारों की मानें तो सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार की ड्यूटी राष्ट्रपति के अधिकारिक कार्यक्रमों या प्रोटोकाल व्यवस्था में नहीं लगाई जा सकती है। यदि कोई सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार वर्तमान में किसी भी सरकारी संविदा या पुर्ननियुक्ति पर नहीं है तो वह आम नागरिक की श्रेणी में आता है और प्रशासनिक प्रोटोकाल ड्यूटी का हकदार नहीं होता।
