न बाड़ी न गुड़ी, हो गई दो करोड़ की गड़बड़ी



–अर्जुन झा-
जगदलपुर। भगवान और मासूम बच्चों को एक समान माना जाता है। मगर बस्तर संभाग के स्वार्थ में अंधे भ्रष्ट तंत्र ने इन दोनों को भी नहीं छोड़ा है। यहां भगवान और नौनिहालों के नाम पर दो करोड़ रुपए से भी ज्यादा का घोटाला कर दिया है। कहीं भी एक ईंट तक नहीं रखी गई और कागजों पर दिखा दिया गया 40 आंगनबाड़ी भवन एवं 50 से अधिक देवगुड़ी निर्माण। यह गजब खेल हुआ बस्तर संभाग के सुकमा जिले की कोंटा जनपद पंचायत में। अफसरशाही का आलम यह कि भाजपा नेताओं की शिकायत तक को दरकिनार कर दिया गया।
सुकमा जिले के जिला एवं मंडल स्तरर के कुछ भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि पूर्व मंत्री के प्रिय पात्र रहे कोंटा जनपद के पूर्व सीईओ एवं पंचायत सचिवों की सांठगांठ के तहत जनपद क्षेत्र में 40 आंगनबाड़ी केंद्र भवन एवं 50 से अधिक देवगुड़ी निर्माण के नाम पर 2 करोड़ से अधिक की राशि का अग्रिम भुगतान प्राप्त कर पूरी राशि डकार ली गई है। इन आंगनबाड़ी भवनों एवं देवगुड़ी निर्माण की स्वीकृति वर्ष 2020-2021 से 2023-2024 की बताई जा रही है। राशि का आहरण कर बंटवारा नेता एवं अधिकारी के बीच किए जाने की चर्चा है। इस मामले पर कुछ बड़े अधिकारी और नेता पर्दा डालने में लगे हैं ताकि पूर्व सरकार के काले कारनामे बाहर न आ सकें। सुकमा जिले के कोंटा जनपद के दो दर्जन से अधिक पंचायतों में नक्सलियों के नाम पर 2021 से 2023 के दौरान विकास एवं निर्माण कार्यों को कागजी अंजाम देकर करोड़ों की बंदरबाट की गई है। इस राशि का हिस्सा सुकमा के कांग्रेस भवन के निर्माण में खर्च किए जाने की भी चर्चा है। पूर्व सरकार के कुछ अधिकारी जो वर्षों से सुकमा में जमे हुए हैं, वे भाजपा नेताओं से संपर्क कर मामले पर पर्दा डालने में जुटे हैं और सफल भी हो चुके हैं। कुछ अधिकारी तबादला होने के बाद भी भी वरिष्ठ अधिकारियों एवं बड़े नेताओं को चढ़ावा अर्पित कर तबादला आदेश निरस्त करा चुके हैं। यही अधिकारी उन काले कारनामों के फाईलों को खुलने से रोक रहे हैं।

इन मदों से मिली थी राशि
जिला एवं मंडल स्तर के कुछ भाजपा नेताओं ने बताया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 50 देवगुड़ी भवनों के जीर्णोद्धार के लिए राशि जारी की गई थी। इसके अलावा 40 से अधिक आंगनबाड़ी भवनों की भी स्वीकृति प्रदान की गई थी। सूत्रों से जानकारी मिली है कि 15वें वित्त मदद एवं डीएमएफटी मद से निर्माण कराने के नाम पर प्रत्येक आंगनबाड़ी के लिए 3 लाख रूपए अग्रिम भुगतान किया गया था। इसी तरह प्रति देवगुड़ी 2 लाख रूपए के मान से अग्रिम राशि के भुगतान की खबर है। इस तरह दो करोड़ से अधिक राशि राशि निकाल तो ली गई, लेकिन न आंगनबाड़ी और न ही देवगुड़ी का निर्माण कराया गया।

जांच रिपोर्ट और शिकायतें दबीं
इस मामले की पूर्व में शिकायत भी की जा चुकी है। जिले में पूर्व मंत्री के करीबी अधिकारी के जमे होने के कारण शिकायती पत्र ही गायब कर दिए गए हैं। इस कारण मामला फाईलों में बंद है। मामले की जांच हुई तो जिला पंचायत व जनपद के पूर्व अधिकारी भी बेनकाब होंगे इसलिए कांग्रेस शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार की फाईलों को भाजपा की सरकार ओपन करने की साहस नहीं जुटा पा रही है।सुकमा जिले में रीपा योजना में करोड़ो की बंदरबांट के साथ कई पंचायतों की जांच रिपोर्ट भी जिला पंचायत की फाईलों में धूल खा रही है। अफसर उन फाईलों को खोलने से बच रहे हैं।

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