कचनार लैंपस सोसाइटी में फर्जी हस्ताक्षर से खाद घोटाला, किसान के केसीसी से उड़ाए 11 हजारों रुपए
बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम कचनार स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति (लैंपस) में किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला उजागर हुआ है। किसानों के केसीसी खातों से अनधिकृत निकासी, फर्जी हस्ताक्षर से खाद आहरण और खाद वितरण में अनियमितता का आरोप लगा है।
बेड़ाउमरगांव निवासी किसान श्याम लाल कश्यप ने 03 नवंबर को लिखित बयान दिया है कि 29 सितंबर को उसके सहकारी बैंक खाते से 11 हजार 359.70 रुपये का खाद आहरण का मैसेज आया, जबकि उसने कोई खाद लिया ही नहीं है। जिला सहकारी बैंक शाखा बकावंड में पता करने पर लैंपस कचनार द्वारा उसके नाम पर खाद वितरण दर्शाया गया है और परमिट रसीद पर फर्जी हस्ताक्षर पाए गए।इसी तरह एक अन्य शिकायत में लगभग 28 हजार रुपये की निकासी का उल्लेख है। ग्राम बेड़ाउमरगांव के ही किसान हरदेव यादव ने धान खरीदी सत्र 2025-26 में धान विक्रय नहीं हो पाने और एग्रीस्टैक से जुड़ी परेशानी की भी शिकायत की है।पीड़ित किसानों ने बताया कि जब उन्होंने प्रबंधक और ऑपरेटर से शिकायत की तो कई दिनों तक टालमटोल किया गया और कहा गया “जो कराना है करा लो”। इसके बाद किसानों ने 27 अक्टूबर को थाने में शिकायत दर्ज कराई।किसानों के लिखित बयान के बाद सहकारिता विभाग हरकत में आया। कार्यालय उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक, जगदलपुर द्वारा 2 नवंबर को जांच हेतु निर्देश पत्र जारी किया गया है। इसमें संबंधित सभी पक्षों को 3 नवंबर को सुबह 11 बजे लैंपस कचनार* में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। जांच के दायरे में केसीसी खातों से अनधिकृत निकासी, फर्जी हस्ताक्षर से खाद आहरण, समिति संचालन में बाहरी हस्तक्षेप और वित्तीय अनियमितताओं सहित कुल 12 बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है।
कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
किसानों ने कलेक्टर बस्तर को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और वर्तमान प्रबंधक को पद से हटाकर नए प्रबंधक की नियुक्ति की मांग की है।जांच में बैंक स्टेटमेंट, केसीसी लेनदेन, खाद स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी, किसानों की प्राप्ति रसीद और हस्ताक्षरों का मिलान महत्वपूर्ण होगा। इस मामले में सहकारिता आयुक्त राकेश शर्मा द्वारा कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद किसानों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल दो किसानों का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के गरीब आदिवासी किसानों के साथ धोखा है।
