फर्जी एनकाउंटर में मारे गए शहीदों की याद में बासागुड़ा, सारकेगुड़ा के ग्रामीणों ने मनाई दसवीं बरसी

दस वर्ष बीत जाने के बाद भी नही मिल पाई शहीदों को न्याय, ग्रामीणों ने लगाया सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप – कमलेश झाड़ी

बीजापुर :- आज से दस वर्ष पूर्व 28 मई 2012 को सारकेगुड़ा के ग्रामीण आदिवासी अपने पारम्परिक रीति रिवाज से बीज त्यौहार मना रहे थे , तभी क्षेत्र से अनभिज्ञ सुरक्षा बलों ने ग्रामीणों को माओवादी समझ कर अंधाधुन्द गोलियां चलाई थी, जिसमे 7 ग्रामीणों सहित कुछ नाबालिक बच्चों की मौत हो गई थी । उक्त जानकारी सीपीआई के जिला सचिव कमलेश झाड़ी ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दिया ।

कमलेश झाड़ी ने आगे बताया कि गोलीकांड की घटना के बाद सबसे पहले ग्रामीणों के दुख दर्द को जानने के लिए सीपीआई के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के नेतृत्व में जांच टीम सारकेगुड़ा पहुंची थी । और इस मामले को लेकर लम्बी लड़ाई भी लड़ी थी, और सभी मृतकों को ग्रामीण आदिवासी बताया था । इसके बावजूद तत्कालिक रमन सरकार इस बात को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नही थी, किंतु जब एनआईए ने अपना जांच रिपोर्ट सौंपा तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया । इसके बाद भी सरकार द्वारा किसी प्रकार से कोई कार्यवाही नही किया और ना ही मृतकों के परिजनों को किसी प्रकार का मुआवजा दिया । उस समय प्रदेश में कांग्रेस प्रमुख विपक्षी पार्टी की भूमिका में थी और इस घटना की जांच और कार्यवाही की मांग बड़े जोर शोर उठा रही थी । किंतु आज कांग्रेस खुद सरकार में है फिर भी इस घटना को लेकर मुँह में दही जमा कर बैठी है । सीपीआई के जिला सचिव कमलेश ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और बीजेपी में कोई अंतर नही है, दोनों सत्ता के भूखे है । इन्हें जनता से झूठे वादे कर सत्ता हथियाना आता है, सत्ता में आते ही जनता से किये वादे को दरकिनार कर अपनी रोटी सेंकने में व्यस्त हो जाते हैं । इस मामले पर सीपीआई ने सरकार से मांग किया है कि सारकेगुड़ा के मामले सहित चुनावी घोषणा पत्र में किये गए वादे तत्काल जनहित में पूरा करें और जनता के साथ उचित न्याय करे ।

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