मनो प्रबंधक तकनीक के उच्च स्तरीय कैप्सूल की जरूरत है जवानों को, कई बार बीजापुर पहुंचकर अनुभव किया है, दर्द है पर दवा नहीं – डॉ वर्णिका शर्मा
बीजापुर (पुष्पा रोकड़े) :- अपने दो दिवसीय प्रवास पर जिला मुख्यालय पहुंची डॉ वर्णिका शर्मा से एक मुलाकात में उन्होंने बताया कि किस तरह वह शोध करती हैं । मिलिट्री के जवानों, पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों को समझने की कोशिश करती हैं, कि उनके दिल दिमाग में किस तरह की थकान आ गई है । जिससे वह मायूस होकर थकान दूर करने के लिए कैप्सूल लेते हैं । डॉक्टर शर्मा बताती हैं कि सन 2011 -12 से वह कई बार बीजापुर का दौरा कर चुकी हैं । इस बार भी वह अपने दो स्टूडेंट के साथ पहुंची हैं । पहले दिन के दौरा में उन्होंने कई लोगों से मुलाकात की उन्होंने बताया कि बीजापुर को उन्होंने पहले भी और आज भी देख रही हूं, काफी परिवर्तन आ चुका है ।डॉ शर्मा बताती हैं कि इन दिनों वो अपने दो मुद्दों को लेकर पहुंची हैं । जिसमें प्रमुख मुद्दा है डीएमएफ फंड उसे किस तरह प्रशासन की टीम लोगों तक पहुंचा रही है, इसका कितना फायदा लोगों को मिल रहा है, किस तरह उस फायदे का लोग उपयोग कर रहे हैं, वास्तव में क्या आम जनता को फायदा मिल रहा है ।
इस के अलावा मनोवैज्ञानिक दबाव । सुरक्षाबलों के मैदानी क्षेत्र और संघर्ष क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति जो अपने दायित्वों निर्वहन कर रहा है, दोनों ही क्षेत्र में पर्याप्त भिन्नता होती है, काम करने में इन भिन्नता को देखते हुए उसकी किस तरह की काउंसलिंग होनी चाहिए या किस तरह से हम प्रबंधक के रूप में उन्हें आगे लाएं हमेशा से प्रश्न रहता था । इसलिए इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस स्पेशल प्रोजेक्ट पर मैंने काम किया हर बार मुझे एक नए प्रोजेक्ट पर पर काम मिला । इस बार मैंने देखा कि मनोवैज्ञानिक अध्ययन करना सुरक्षाबल के जवानों में मनोविज्ञान का अध्ययन करना कि क्या उनके लक्षण हैं, कैसे उनकी मानसिकता है , क्या उनके दिमाग में क्या चल रहा है, वह क्या सोच रहे हैं, किस तरह से उनकी काउंसलिंग होनी चाहिए, मैदानी क्षेत्र और कामकाजी क्षेत्र में काफी अंतर होता है । बीजापुर में काफी भिन्नता है कामकाज क्षेत्र में अगर हम जवानों की बात करें तो ज्यादातर जवान यहां तनाव में रहते हैं ।
डॉ शर्मा ने बताया किडीएमएफ फंड के बारे में जानकारी एकत्रित कर रही हुं । जिला प्रशासन ने बताया कि उन्हें जल ही जीवन है सड़क है तो कल है । शिक्षा हैं तो जीवन बेहतर जिंदगी के लिए सड़क की बहुत ज्यादा आवश्यकता है । शिक्षा के क्षेत्र में भी देखना सबसे बड़ी समस्या है । इन दिनों बीजापुर में लाल पानी की समस्या सबसे बड़ी समस्या दिखाई दे रही है । इस पर जिला प्रशासन को विशेष तौर पर काम करने की आवश्यकता है, थोड़ा है थोड़े की जरूरत है पर किया तो है पर अब बहुत कुछ करने की आवश्यकता है, बड़े स्तर पर इस पर काम करने की आवश्यकता है । एडवांस टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए प्रत्येक सरकारी योजनाओं का कागज पर नहीं मैदानी योजनाओं पर काम करने की आवश्यकता है ।
*किस वजह से सुसाइड करते हैं जवान-
काफी दिनों से दिमाग में एक गुत्थी बैठी हुई होती है, जो धीरे धीरे करके बढ़ते बढ़ते इतना बढ़ जाता है कि किसी एक दिन वह विस्फोट के रूप में अपना रूप ले लेता है और वह प्राण घातक हो जाता है, कई घटनाएं मैंने अक्सर मुख्यालय के बटालियन से सुने हैं, उच्च स्तरीय अधिकारी अक्सर कहते हैं कि जवान ड्यूटी के लिए आए हैं, परिवार छोड़ देना और परिवार के लिए ही काम कर रहे हैं परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह भी एक मानव है और मानव प्रवृत्ति किसी बात को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए । क्योंकि कामकाजी क्षेत्र में अक्सर कई प्रकार के तनाव के वातावरण बनते रहते हैं ।और वह एक अलग अपनी गुत्थी दिमाग में बनाए हुए होते हैं । जवानों को मेंटल रिलैक्सेशन बहुत जरूरी है वरना वो काफी हद तक दिमाग की थकान को ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, जिसे उच्च अधिकारियों को देखने की आवश्यकता है, किस स्तर तक वह जवान अपने मानसिक तनाव को बढ़ाता ही चला जा रहा है, समय समय पर उसे महसूस करने की आवश्यकता है ।
*कैसे पता चलेगा कि वह जवान डिप्रेशन में है-
डॉक्टर कहते हैं कि जब जवान मानसिक थकान से गुजर रहा होता है उस समय महसूस करके उसके मानसिक थकान किस लेबल पर पहुंच चुका है । उसे महसूस करने की आवश्यकता है मेरा सुझाव है कि हर बीमारी के लिए जैसे अलग-अलग टेस्ट होते हैं, उसी तरह समय-समय पर जवानों के लिए काउंसलिंग कार्यशाला का आयोजन भी होना चाहिए, जिस पर वह खुलकर अपनी बात रखें चाहे वह परिवारिक हो, प्रशासनिक हो। जिस तरह की भी उसकी तकलीफ हो वह खुलकर कहे मस्तिष्क का बिटवे समय-समय पर चेक होना चाहिए ।
