पोषडपल्ली में हर्षोल्लास व भक्ति भाव से सम्पन्न होने जा रहा श्री सकलनारायण मेला समारोह

भोपालपटनम (जरखांन) :- हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गुड़ी पड़वा (उगादि) एवं चैत्र मास के पावन अवसर पर ग्राम पोषडपल्ली मंदिर परिसर में बड़े ही धूमधाम भक्ति श्रद्धा व क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार श्री सकल नारायण मेला समारोह का भव्य आयोजन दिनांक 18/03/2023 से 22/03/2023 तक संपन्न होने जा रहा है। जिसके लिए दिनांक 18/03/2023 दिन शनिवार को मंदिर परिसर में मंडप आच्छादन कार्यक्रम दिनांक 19/03/2023 दिन रविवार को गोवर्धन पर्वत पूजा अर्चना एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम दिनांक 20/03/2023 दिन सोमवार भगवान श्री कृष्ण का पूजा अर्चना मंदिर परिसर में किया जाएगा।

दिनांक 21/03/2023 दिन मंगलवार दोपहर 2:00 बजे राधा कृष्ण का विवाह कार्यक्रम शोभायमान मण्डप में संपन्न होगा। शाम को लोकल देवी नृत्य एवं रिकॉर्डिंग डांस कार्यक्रम सम्पन्न होगा ।यह कार्यक्रम वन विभाग बीजापुर की सौजन्य से सम्पन्न होगा। दिनांक 22/03/2023 दिन बुधवार प्रातः 7:0 बजे भगवान श्री कृष्ण का रथ यात्रा कर मेला का समापन किया जाता है। उसी दिन गुड़ी पड़वा (उगादि) हिंदू नव वर्ष। चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होता है।

इस मेले की विशेषता है कि यह बहुत ही प्राचीन काल की गुफा में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान है। मंदिर परिसर से गुफा की दूरी लगभग 3 किलोमीटर चिंता वागु नाला पार कर वनों से आच्छादित रास्ता से गुफा तक जाना पड़ता है। गुफा में दर्शन हेतु दर्शनार्थियों को टार्च की आवश्यकता होती है। क्योंकि गुफा के अंदर अंधेरा छाया हुआ रहता है। गुफा के आसपास के पत्थरों में बड़े-बड़े मधुमक्खियों के छाता लगा हुआ रहता है। यह मधुमक्खियां दर्शनार्थियों के लिए किसी प्रकार का क्षति नहीं पहुंचाते है । यह एक अदभुत चमत्कार का विषय है। ग्राम के पुजारियों के अनुसार इस गुफा के आस पास बहुत से मोर के पंख बिखरा हुआ रहता है। और कभी-कभी मुरली की मधुर आवाज सुनाई भी देता है। इस गुफा में छोटे-छोटे शिला से बनी हुई मूर्तियां सुंदर आकृति में दिखाई देता है।

पुराणों की कथा के अनुसार इस गुफा की विशेषता यह है की इस गुफा से द्वापर युग की कहानी प्रचलित है। द्वारिकापुरी में निवास करने वाले सत्राजित यादव ने सूर्य नारायण की आराधना की तब भगवान सूर्य ने उसे नित्य 8 भाग सोना देने वाली स्यमातक नामक मणि अपने गले से उतार कर दे दी। मणि को पाकर सत्राजीत यादव जब समाज में गये तो श्री कृष्ण उस् मणि को प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की । सत्राजीत वह मणि श्रीकृष्ण को देने से इंकार कर अपने भाई प्रसन्नजीत को दे दी। एक दिन प्रसन्नजीत घोड़े पर चढ़कर शिकार के लिए जंगल गया, वहां एक शेर ने उसे मार डाला और मणि को ले ली। रोछो का राजा जामवंत उसको मारकर मणि को लेकर गुफा में चला गया। जब प्रसन्नजीत कई दिनों तक शिकार से घर ना लौटा तो सत्राजीत को बड़ा दुख हुआ। उसने सोचा कि श्रीकृष्ण ने ही मणि प्राप्त करने के लिए उसका वध कर दिया होगा। अंततः बिना किसी सबूत जुटाए या जानकारी लिए उसने प्रचार प्रसार किया है की श्री कृष्ण ने ही प्रसन्नजीत को मारकर स्यामंतक मणि छीन ली है ।

इस लोक निंदा निवारण के लिए भगवान श्री कृष्ण ने बहुत से यादवो के समूह की टोली के साथ प्रसन्नजीत को ढूंढने के लिए चले गए। वहां पर प्रसन्नजीत को शेर के द्वारा मार डालना और शेर को रीछ के द्वारा मारने की पहचान मिली ।यह रीछ के पैरों की खोज करते हुए जामवंत की गुफा पर चले गए, और गुफा के भीतर चले गए वहां उन्होंने देखा है कि जामवंत की पुत्री उस मणि से खेल रही थी। कृष्ण को देखते ही जामवंत युद्ध के लिए तैयार हो गया। युद्ध छिड़ गया इधर गुफा के भीतर श्री कृष्ण के साथियों ने उनकी आने का 7 दिन तक प्रतीक्षा की ।फिर लोग उन्हें मर गया, समझकर वापस द्वारिकापुरी चले गए। इधर 21 दिन तक लगातार युद्ध करने पर भी जामवंत श्रीकृष्ण को पराजित ना कर सका। तब उसने सोचा कि यह वहां अवतार तो नहीं जिसके लिए मुझे भगवान श्री रामचंद्र जी का वरदान मिला। यह पुष्टि होने पर जामवंत ने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना मांगी और उसने अपनी पुत्री जामवंती का विवाह श्री कृष्ण के साथ कर दिया और उस मणि को उपहार के स्वरुप भगवान श्री कृष्ण को भेंट किया। जब उस मनी को लेकर श्री कृष्ण वापस गए तो सत्राजीत अपने किए हुए कार्य पर बहुत लज्जित हुए । इस लज्जा से मुक्ति के लिए उसने भी अपनी पुत्री का विवाह भगवान श्री कृष्ण से कर दिया।

पुराणों के अनुसार इस पौराणिक कथा का समावेश इस गुफा से माना जाता है। यह मेले में छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना महाराष्ट्र के श्रद्धालु गुफा में विराजमान श्री कृष्ण का दर्शन कर जीवन में सुख समृद्धि का वरदान मांगते हैं यह मेले में ग्राम पंचायत के द्वारा पीने की पानी का व्यवस्था एवम भोजन की व्यवस्था की जाती है । बिजली विभाग के द्वारा बिजली की व्यवस्था की जाती है। इस वर्ष यहां आ रहे भक्त गणों के लिए काका परिवार की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई है ।

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