बस्तर और चित्रकोट के हित में जारी रहेगा संघर्ष बैज



बस्तर की आन, बान और शान के लिए जीवन समर्पित


लोहंडीगुड़ा (अर्जुन झा) :- बस्तर की आन, बान और शान के लिए मेरा पूरा जीवन समर्पित है। जब तक जिंदा हूं, बस्तर लोकसभा क्षेत्र और चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र के विकास तथा यहां के लोगों की खुशहाली के लिए संघर्ष करता रहूंगा। विपक्षी दुष्प्रचार कर रहे हैं कि एक ही व्यक्ति को चित्रकोट के लोग बार बार क्यों जिताते हैं। दरअसल बार बार मैं नहीं जीतता, बल्कि चित्रकोट के लोगों के भरोसे और विश्वास की जीत बार बार होती है। इस भरोसे और विश्वास की डोर को मैं कभी टूटने नहीं दूंगा। यह कहना है सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी दीपक बैज का।
अपने व्यस्त चुनाव प्रचार के बीच दीपक बैज ने इस संवाददाता से विस्तृत बातचीत कि। चित्रकोट विधानसभा क्षेत्र के लोहंडीगुड़ा ब्लॉक के ग्राम गढ़िया के मूल निवासी दीपक बैज चित्रकोट क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने श्री बैज को बस्तर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में भी उन्होंने विजय प्राप्त की। यह बात विपक्षी दल और प्रतिद्वन्दी उम्मीदवारों को हजम नहीं हो रही है। विपक्षी दल के लोग और दीगर उम्मीदवार चित्रकोट के मतदाताओं को यह कहकर बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक ही व्यक्ति को बार बार क्यों जितवाते हो। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दीपक बैज ने कहा कि बार बार मैं नहीं जीतता, बल्कि चित्रकोट की जनता के भरोसे और विश्वास की जीत होती है। चित्रकोट की जनता की सेवा मैंने पूरी ईमानदारी से और समर्पण भाव से किया है। इसी वजह से लोग मुझे बेशुमार प्यार देते हैं और मुझ पर भरोसा करते हैं। जब तक जीवन है, लोगों की सेवा करता रहूंगा, क्षेत्र के विकास के लिए पूरी ताकत झोंककर काम करूंगा और जनता के भरोसे की डोर को कभी टूटने नहीं दूंगा। श्री बैज ने कहा कि बस्तर के लोग भोले भाले जरूर होते हैं, मगर यूं ही किसी पर भरोसा नहीं कर बैठते। अच्छी तरह ठोंक बजाकर और परखने के बाद ही वे सामने वाले के लिए अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार हो जाते हैं। मैं बेहद खुशकिस्मत हूं कि लोग मुझ पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। ऐसे में मैं अपनी जनता से विश्वासघात करने के बारे में सोच भी नहीं सकता। दीपक बैज इसलिए भी चित्रकोट के लोगों के दिलों में राज करते हैं क्योंकि वे सहज, सरल और हमेशा सुलभ रहते हैं। संगठन और सियासत में महत्वपूर्ण ओहदों पर रहते हुए भी घमंड नाम की चीज दीपक बैज के इर्द गिर्द भी फटक नहीं पाई है। क्षेत्र का हर व्यक्ति किसी भी समय उनसे बेझिझक मिल सकता है। यही वजह है कि लोग उन्हें अपना जनप्रतिनिधि कम और अपने परिवार का सदस्य ज्यादा मानते हैं। इस बात का प्रमाण क्षेत्र के भाजपा समर्थकों का लगातार कांग्रेस से जुड़ते जाना है। क्षेत्र में जनसंपर्क पर रहने के दौरान दीपक बैज के समक्ष प्रायः हर दिन किसी न किसी गांव के दर्जनों ग्रामीण कांग्रेस में शामिल हो ही जाते हैं।

उपलब्धियों की लंबी फेहरिश्त
ऐसा नहीं है कि दीपक बैज जुमलेबाज हैं, हकीकत तो यह है कि वे जो कहते हैं करके दिखाते हैं। कमिटमेंट के पक्के हैं बस्तर के ये माटीपुत्र। उनकी उपलब्धियों की फेहरिश्त बड़ी लंबी है। उनकी चुनिंदा उपलब्धियों में नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण पर रोक लगवाना, नंदराज पहाड़ की लीज वापस कराना, टाटा ग्रुप के लिए अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस दिलवाना, बोधघाट बांध परियोजना का काम रद्द कराना, बस्तर की मुख्य सड़कों को भारतमाला परियोजना में शामिल कराना, स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे से जुड़वाना आदि शामिल हैं। इनके लिए बतौर सांसद दीपक बैज ने संसद से लेकर सड़क तक लड़ाई लड़ी। उनके संघर्ष का ही परिणाम है कि एनएमडीसी द्वारा स्थापित नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण का फैसला केंद्र की मोदी सरकार को वापस लेना पड़ा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को सार्वजनिक मंच से घोषणा करनी पड़ी कि नगरनार इस्पात संयंत्र पर पहला अधिकार बस्तर के आदिवासियों का है, इसका निजीकरण नहीं होगा। जो व्यक्ति अपनी दृढ इच्छाशक्ति और जनसमर्पण की भावना के दम पर केंद्र सरकार को भी झुकने पर मजबूर कर दे, वह दीपक क्षेत्र के लोगों के दिलों पर तो जगमगाता रहेगा ही। विपक्ष भले ही झूठ की कितनी भी तेज आंधी क्यों न चला ले?

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