छत्तीसगढ़ के दक्षिण में कौन घोल रहा है पश्चिम का यह जहर…?


नशीली दवाओं की गिरफ्त में आ चुके हैं बस्तर के युवा


जगदलपुर(अर्जुन झा ):- हमारे बस्तर को न जाने किसकी नजर लग गई है कि यह खूबसूरत चमन तबाह होता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के इस दक्षिणी हिस्से में न जाने कौन पश्चिम का जहर घोल रहा है कि मेरे बस्तर के भोले भाले युवा खोखले हुए जा रहे हैं। शहीद गुंडाधुर की कर्मभूमि के वीर आदिवासी युवा ड्रग एडिक्ट बनते जा रहे हैं। बस्तर की शांत, शीतल और सौम्य धरती पर बर्बादी की इबारत लिखी जा रही है। ऐसे खतरनाक हालातों से निपटने के लिए जनप्रतिनिधि और समाज के कर्णधार कोई पहल नहीं कर रहे हैं। यह और भी चिंता का विषय है।
बस्तर के युवाओं में जिस तरह से नशीली दवाओं के उपयोग का चलन बढ़ता जा रहा है, वह बस्तर के भविष्य के दारुण दृश्य की ओर इंगित कर रहा है। बस्तर के लोग शुरू से महुआ शराब, लांदा और सल्फी के शौकीन रहे हैं। ये नशीली होती हैं और मगर प्रकृति प्रदत्त हैं, पर इनके साइड इफेक्ट नुकसानदेह नहीं हैं। सल्फी एवं लांदा को भूख बढ़ाने में सहायक एवं पाचक तथा महुआ शराब को थकान मिटाने वाला माना जाता है। जन्म से मरण तक बस्तर के आदिवासियों का महुआ शराब, लांदा और सल्फी से नाता बना रहता है। हर तीज त्यौहार, संस्कार में इनकी उपयोगिता रहती है। मगर आज के बस्तरिहा युवा अपने इन परंपरागत पेय पदार्थों को तिलांजलि देकर नशीली गोलियों, कैप्सूल्स, सिरप, विलायती शराब, गांजा, मधुर मुनक्का जैसे घातक नशे के सामानों को अपना रहे हैं। नाइट्रोवेट 10 टेबलेट, अल्प्राजोलम टेबलेट, कैप्सूल, कफ सिरप आदि का नशा करने लगे हैं। कहने को तो ये दवाइयां हैं, मगर इनके दुष्परिणामों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इनके क्रय – विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया है। न्यूरो पेशेंट्स को ही इनकी हल्की डोज दी जाती है। यहां के युवा इन प्रतिबंधित दवाओं की ज्यादा डोज लेने लगे हैं और ये उन्हें घर पहुंच सेवा के जरिए आसानी से उपलब्ध भी हो रही हैं। इन प्रतिबंधित दवाओं को दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों से लाकर यहां खपाया जा रहा है। पांच रुपए कीमत वाली टेबलेट और कैप्सूल पंद्रह रुपए में बेची जाती है। शराब से सस्ती और टिकाऊ नशे वाली होने के कारण युवा इन्हें खरीदने में जरा भी संकोच नहीं करते और दो -दो गोलियां निगलकर नशे की लत पूरी करते हैं। इन दवाओं की तस्करी और बिक्री में भी स्थानीय लोग ही शामिल हैं। हाल के दिनों में जगदलपुर पुलिस ने एक महिला को माड़िया चौक कुम्हार पारा सुलभ के पास पकड़ा था। इस महिला के पास से 554 नग नशीली कैप्सूल बरामद हुई थी। इसी तरह आसना रोड पर 2400 नग प्रतिबंधित नशीली टेबलेट के साथ आरोपी सूरज मंडावी कुम्हारपारा कोसा सेंटर के पीछे जगदलपुर और आशीष जार्ज को पुलिस टीम ने वाहनों की चेकिंग के दौरान पकड़ा था। उनके पास से 2400 नग अवैध नशीली अल्प्राजोलम टेबलेट आईपी 0.5 एमजी पाई गई। इसके पहले भी लगभग डेढ़ दर्जन मामले पकड़े जा चुके हैं।

शरीर को खोखला बनाती हैं ये दवाएं
रसायन शास्त्र के जानकारों के मुताबिक ऐसी नशीली दवाएं मनो मस्तिष्क पर बेहद घातक असर डालती हैं। इनके लंबे समय तक उपयोग से शरीर खोखला हो जाता है, नपुंसकता आ जाती है, मस्तिष्क काम नहीं करने लगता और आदमी पागलपन का शिकार बन जाता है। नाइट्रोवेट -10 टेबलेट तो व्यक्ति को बड़ा ही खतरनाक बना देता है। इस टेबलेट को खाने वाला इंसान अपने ही शरीर को ब्लेड या चाकू से बुरी तरह खरोच डालता है और दूसरे व्यक्तियों पर हमले करने के लिए भी उद्द्त हो जाता है। कुछ ऐसा ही हाल बस्तर के नशेड़ी युवाओं का होने लगा है। ऐसे भटके युवाओं को साइकोलॉजिस्ट और मनोरोग विशेषज्ञ के पास उपचार एवं परामर्श के लिए ले जाना जरुरी हो जाता है।

ओड़िशा से गांजा की तस्करी
ऐसा नहीं है कि बस्तरिहा युवा सिर्फ ड्रग एडिक्ट हो रहे हैं, गांजे की लत भी उनके शरीर को घुन की तरह खाए जा रही है। बस्तर में गांजा ओड़िशा से तस्करी कर लाया और खपाया जाता है। नगरनार और बकावंड थाना क्षेत्रों की सीमाएं ओड़िशा से लगी हुई हैं। उन्हीं रास्तों से यहां गांजा लाया जाता है। नगरनार, जगदलपुर सिटी कोतवाली और बकावंड पुलिस गांजा तस्करी के पचासों मामले पकड़ चुकी है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों के लिए भी बस्तर जिले के रास्ते ओड़िशा से गांजा की तस्करी होती रहती है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के अनेक गांजा तस्कर हाल के दिनों में गिरफ्तार किए गए हैं। गांजे के मामले में भी बस्तर हॉट स्पॉट के रूप में पहचान बना चुका है। छत्तीसगढ़ के कई भिलाई, दुर्ग, रायपुर समेत कई जिलों में बस्तर से होकर ही ओड़िशा का गांजा खपाया जाता है।

आईपीएस विकास कुमार ने कसी नकेल
बस्तर में नशीली दवाओं और गांजा तस्करी पर नकेल कसने में आईपीएस विकास कुमार ने शानदार भूमिका निभाई है। प्रशिक्षु आईपीएस विकास कुमार ने जबसे जगदलपुर में सीएसपी के पद पर कार्यभार सम्हाला है, तबसे नशीली गोलियों, कैप्सूल्स, सिरप, गांजा तस्करी के मामले धड़ाधड़ पकड़े जा रहे हैं। युवा पुलिस अधिकारी विकास कुमार की कार्यशैली भले ही कुछ सियासतदानों को नागवार गुजरती हो, मगर युवा पीढ़ी को बर्बादी से बचाने के लिए उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों की शहर व अंचल के बुद्धिजीवी सराहना ही कर रहे हैं। ऐसे बुद्धिजीवियों का कहना है कि विकास कुमार भटक रही युवा पीढ़ी को समाज एवं विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बेहतरीन काम कर रहे हैं।

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