जमीन पर ही रह जाएंगे तारापुर के सितारे!

अर्जुन झा-
बकावंड। कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी तारे जमीं पर। यह फिल्म एक एबनॉर्मल बच्चे पर आधारित थी, जिसे घर परिवार से दूर एक आवासीय स्कूल में उसके माता पिता ने दाखिला दिला दिया था। मगर यहां तो घर के पास उत्कृष्ट स्कूल रहते हुए भी तारापुर गांवके नन्हे मुन्ने सितारों को दमकने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इससे लगने लगा है कि तारापुर के सितारे जमीं पर ही रह जाएंगे, वे कभी आसमान की शान नहीं बन पाएंगे।

बकावंड विकासखंड की ब्लाक ग्राम पंचायत तारापुर में शासन ने पीएम श्री स्कूल तो खोल दिया है, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट वाले इस स्कूल को वह सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं, जिसका वह हकदार है।तारापुर के पीएम श्री स्कूल में कक्षा पहली से पंचवी तक कुल 200 बच्चों का दाखिला हो चुका है और अभी अभी भर्ती चालू है। दर्ज संख्या का आंकड़ा 300 तक पहुंच सकता है, मगर यहां केवल 3 ही शिक्षक हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि 300 बच्चों को महज तीन शिक्षक आखिर किस तरह पढ़ा पाएंगे? इस स्कूल स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी और इसे पीएम श्री स्कूल का दर्जा हाल के वर्षों में मिला है। दर्जा तो बढ़ा दिया गया मगर स्कूल में और शिक्षकों की अब तक व्यवस्था नहीं की गई है।सहायक शिक्षक चद्रभव सिंह ने बताया कि स्कूल में 4 चार शिक्षकों मांग पालक कर रहे हैं। अभी यहां केवल एक ही पंचायत के बच्चों का दाखिला हुआ है और दर्ज संख्या 200 को पार कर चुकी है। ग्राम पंचायत तारापुर की सरपंच आसमती कश्यप, उप सरपंच श्याम भाई पटेल, पंच नवीना, कमल नेताम, शंकर भारती, प्रभु कश्यप, भगतवती, क्षेत्र क्रमांक 21 के जनपद सदय सुभरना नेताम ने कहा है कि महज तीन शिक्षकों के भरोसे इतने सारे बच्चों की पढ़ाई हरगिज मुमकिन नहीं है। यहां कम से कम छह शिक्षक नियुक्त किए जाने की जरूरत है। अगर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती है तो तारापुर के सितारे उभर नहीं पाएंगे।

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