भोपालपटनम में हाईमास्ट लाइट घोटाला

मुर्गेश कुमार शेट्टी-
भोपालपटनम। नगर पंचायत भोपालपटनम में हाल ही में लगाई गई हाई मास्ट स्ट्रीट लाइट्स अब सवालों के घेरे में आ गई है। लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से लगाई गईं ये लाइट्स एक साल भी नहीं टिक पाईं और अब कई मोहल्लों व गलियों में अंधेरा पसरा हुआ है।
नगर पंचायत क्षेत्र में लगभग 10 हाई मास्ट लाइटें विभिन्न वार्डों में लगाई गई थीं। करोड़ों के बजट में यह योजना शुरू हुई थी, लेकिन हकीकत यह है कि आज कहीं लाइट जल रही है, तो कहीं पूरी तरह से बंद है।अस्पताल रोड से लेकर बालाजी मंदिर रालापल्ली तक स्ट्रीट लाइट विस्तार पर 25 लाख रुपए, और चिकुडपल्ली अस्पताल से गांव तक के विस्तार पर 32 लाख रुपए खर्च किए गए, लेकिन यह लाइटें टेस्टिंग के बाद से ही बंद पड़ी हैं।


कमीशनखोरी का आरोप
सूत्रों के अनुसार यह मामला कथित कमीशनखोरी और घटिया गुणवत्ता से जुड़ा हो सकता है। ठेका कम दर पर देने के चक्कर में क्वालिटी से समझौता कर लिया गया और अब इसका खामियाजा भोपालपटनम की जनता को भुगतना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि ठेका फर्म द्वारा स्तरहीन लाइट्स लगाई गईं थीं। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ननगर पंचायत के कर्णधारों को कमीशन देना था।

संकट में सुरक्षा, जनता में आक्रोश
रात के समय गलियों में अंधेरा होने से महिलाओं, बुज़ुर्गों और बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। इसके बावजूद नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
अब जनता सवाल पूछ रही है कि शासन ने संसाधन और धन दिए, फिर भी लापरवाही
क्यों? यह सबसे चिंताजनक बात यह है कि मात्र 6 महीने पहले नगर पंचायत ने स्ट्रीट लाइट सुधारने के लिए एक क्रेन टाइप वाहन खरीदा गया, लेकिन उसे नगर पंचायत कार्यालय में शो पीस की तरह खड़ा कर दिया गया है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
जहां जनता जवाब मांग रही है, वहां जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौन हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोई स्वतंत्र जांच होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? अब देखना है कि नगर पंचायत कब जागेगी? भोपालपटनम की जनता की निगाहें अब प्रशासन पर हैं। वे चाहते हैं कि इस मामले की जांच हो, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, और फिर से गलियों में रोशनी लौटे।

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