गड्ढों में डूब गया विकास, सरपंच-सचिव ने 1.49 लाख में बनाया मच्छरों का सेल्फी पॉइंट
–मुरुगेश कुमार शेट्टी-
भोपालपटनम। जहां सरकार स्वच्छ भारत और हर गांव के विकास का नारा दे रही है, वहीं बीजापुर जिले की एक पंचायत में विकास ने गड्ढों में दम तोड़ दिया है। ग्राम पंचायत दम्मूर अंतर्गत ग्राम दुबलंगुड़ा में विकास कार्यों को लेकर फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां पूर्व सरपंच रमेश चिड़ेम और सचिव ओमप्रकाश कोरम पर ग्रामवासियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सेग्रीगेशन शेड निर्माण के लिए जनवरी 2025 में 1 लाख 49 हजार की राशि निकाली गई, लेकिन मौके पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। बताया गया है कि यह राशि पंचायत चुनाव से ठीक एक माह पहले निकाली गई थी। कार्य के नाम पर केवल छः गड्ढे खोदे गए, जिनमें आज बारिश का पानी भर गया है और वहां मच्छरों ने डेरा जमा लिया है। अब यह गड्ढे मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू जैसी बीमारियों का घर बनते जा रहे हैं।
काम नहीं, गड्ढे ही गड्ढे
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सेग्रीगेशन शेड निर्माण के नाम पर सरपंच और सचिव ने मिलीभगत कर राशि निकाल ली और गड्ढे खोदकर अधूरा छोड़ दिया। यहां तक कि इस बारे में न तो ग्रामीणों को जानकारी दी गई और न ही वार्ड पंचों को बताया गया। गांव के लोगों ने इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी राशि का इस तरह दुरुपयोग होगा और गांव बीमारियों की चपेट में आएगा, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
क्या कर रहा है प्रशासन?
अब सवाल यह है कि जनवरी से अब तक इस मामले में जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारी या इंजीनियर द्वारा क्या एक्शन लिया गया? कोई निरीक्षण या जांच क्यों नहीं की गई? क्या यह लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को खुला न्योता है? ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला कलेक्टर कार्यालय में जांच हेतु आवेदन करेंगे।
सेग्रीगेशन शेड के नाम पर सिर्फ गड्ढे खोदकर सरकारी राशि हजम कर ली गई है। यह न सिर्फ विकास कार्यों के साथ मजाक है, बल्कि यह गांव वालों के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ भी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गड्ढे में डूबे विकास को कब बाहर निकालता है।
