गांव- गांव में बिखरी जनजातीय संस्कृति की छटा

बकावंड। विश्व आदिवासी दिवस पर बस्तर,भानपुरी, बकावंड, जैबेल और जगदलपुर में पारंपरिक तरीके और धूमधाम से रैलियां निकाली गई तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हर जगह जनजातीय संस्कृति की छटा बिखरती रही।
बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों बस्तर,भानपुरी, बकावंड, जैबेल और जगदलपुर आदि विकास खंडो में विश्व आदिवासी दिवस बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। आदिवासी समुदाय के लोगों ने पारंपरिक पोशाक पहनकर ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और लोकगीत-नृत्यों के साथ भव्य रैलियां निकाली। बकावंड मुख्यालय के बाजार फसरा माटी देव घर परिसर में समाज के नाइक-पाइक का फूलमाला, टॉवेल और पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया। स्कूली बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक लोक नृत्यों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। समाज प्रमुख ने बच्चों की प्रस्तुति से प्रभावित होकर 2 हजार रुपए का पुरस्कार भी दिया और बस्तर की संस्कृति व परंपराओं को संजोने की जिम्मेदारी सभी को याद दिलाई। जगदलपुर में भी चौक-चौराहों से लेकर विभिन्न स्थानों पर आयोजनों की रौनक रही। बिरसा मुंडा की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की गई और आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार श्रद्धांजलि दी गई। युवा प्रकोष्ठ के सदस्यों ने ग्राम प्रमुखों को पगड़ी पहनाकर उनका अभिनंदन किया और वीर गुंडाधुर की प्रतिमा स्थापना की मांग को दोहराते हुए निर्धारित स्थल पर भूमिपूजन किया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। पूरे आयोजन के दौरान जिला प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। यह आयोजन बस्तर की आदिवासी परंपरा, संस्कृति और एकता का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।

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