घोठा गांव में भी कन्वर्जन विरोधी लहर, ग्रामीण हुए लामबंद
जगदलपुर। बस्तर के कांकेर जिला अंतर्गत भानुप्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम घोटा में भी पास्टर पादरी का प्रवेश और धर्मांतरण क्रियाकलाप वर्जित कर दिया गया है ।
बस्तर संभाग के गांव गांव में कन्वर्जन विरोधीलहर हिलोरें मार रही हैं। इसका व्यापक असर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर डिवीजन में देखने को मिल रहा है।इस डिवीजन के ग्राम कुडाल, बांसला, परवी केंवटी और अंतागढ़ ब्लॉक के हवेचुर बोदेनार आदि गांवों में पास्टरों, पादरियों, ननों और कन्वर्जन कराने वालों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। आदिवासी अपनी परंपराओं, संस्कृति और पूजा पद्धति के संरक्षण का हवाला देते हुए ऐसा कदम उठा रहे हैं। वहीं बस्तर जिले में अभी भी कन्वर्जन का खेल जारी है। भानुप्रतापपुर के ग्राम घोठा में भी अब पास्टरों, पादारियों के प्रवेश और मिशनरी के क्रियाकलापों पर कड़ाई से रोक लगा दी गई है। इस संबंध में गांव के बाहर सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। ग्राम घोठा के गायता अर्जुन कोमरा, सर्व आदिवासी समाज जिला उपाध्यक्ष ज्ञान सिंह गौर एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला, पुरुष युवा उपस्थित थे। अब एक के बाद गांवों में आदिवासी स्वस्फूर्त होकर पादरियों द्वारा किए जा रहे कन्वर्जन के खिलाफ मोर्चा खोलने लगे है। घोठा गांव में कन्वर्जनके खिलाफ पूरे गांव वालों ने बैठक की। बैठक में पास्टर पादरियों के गांव में प्रवेश को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया।
