शिक्षकों ने स्कूल में कराया बाल श्रम!



अर्जुन झा-
बकावंड। स्कूल, जहां बच्चों को पाठ्यक्रम की पढ़ाई के साथ बाल श्रम, बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक भी किया जाता है, उसी ज्ञान के मंदिर में अगर ज्ञानदाता शिक्षक खुद बाल श्रम कानून का मखौल उड़ाएं, तो इससे बड़ा अपराध क्या हो सकता है भला? जी हां, ऐसा ही हो रहा है बस्तर जिले के सबसे शिक्षित विकासखंड बकावंड में। ऐसा कृत्य कोई अनपढ़ व्यक्ति नहीं बल्कि हमारे समाज के पूज्यनीय कर रहे हैं।
विकासखंड मुख्यालय बकावंड स्थित गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल में नाबालिग छात्राओं से बाल श्रम कराए जाने का मामला सामने आया है। छात्राओं से स्कूल कैंपस में उग आई घास की छिलाई और सफाई कराई जाती है। बाल श्रम का यह मामला शनिवार सुबह लगभग 9 बजे तब सामने आया, जब हमारे संवाददाता अचानक स्कूल पहुंच गए।इस दौरान विद्यालय प्रबंधन की गंभीर लापरवाही और बाल श्रम कानून के सरेआम उल्लंघन का मामला उजागर हुई। खेल अवधि समाप्त होने के बाद जहां छात्राओं को कक्षा में लौटकर पुस्तकों एवं कॉपियों के साथ अध्ययन करना था, वहीं छात्राओं को फावड़ा पकड़ाकर स्कूल परिसर में घास की छिलाई कराई जा रही थी। छात्राएं स्कूल ड्रेस में ही मैदान के एक हिस्से में झुककर घास छीलती नजर आईं। कुछ छात्राएं धूप में खड़ी थीं, तो कुछ स्टाफ की निगरानी में परिसर की साफ-सफाई में लगीं थी। यह दृश्य देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे स्कूल परिसर किसी मनरेगा मजदूरी वाला कार्य स्थल हो। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि खेल अवधि समाप्त होते ही शिक्षक छात्राओं को पढ़ाई के लिए कक्षा में भेजने के बजाय काम करवाने के निर्देश दे रहे थे। कई छात्राएं इस प्रक्रिया से असहज भी दिखीं, लेकिन उन्होंने मन मारकर काम किया क्योंकि उन्हें डर था कि मना करने पर डांट या सजा मिल सकती है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी, साफ-सफाई या परिसर निर्माण से जुड़ा कोई भी कार्य करवाना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। बच्चों से श्रम कराना न केवल उनके शैक्षणिक अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि बाल-सुरक्षा कानूनों का भी गंभीर हनन है।

पालकों में रोष, कार्रवाई की मांग
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि हम भले ही मजदूरी कर घर चलाते हैं, अपना पेट काटकर अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं। आर्थिक संकट में घिरे रहकर भी हम कभी अपने बच्चों को कहीं मजदूरी करने के लिए नहीं भेजते। पालकों ने कहा कि वे अपने बच्चों को स्कूल पढ़ाई के लिए भेजते हैं, न कि मेहनत-मजदूरी कराने के लिए। उनका कहना है कि यदि स्कूल प्रबंधन को श्रमिकों की आवश्यकता है तो इसके लिए अलग से व्यवस्था होनी चाहिए, न कि मासूम बच्चों को काम पर लगाया जाए। अभिभावकों ने इस मामले में जांच कर दोषी शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चे पढ़ने आते हैं, और स्कूल का प्राथमिक कर्तव्य उनके शिक्षा, सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देना है।घटना की जानकारी मिलने के बाद सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगी तो स्कूलों में बच्चों के अधिकारों का खुलेआम हनन जारी रहेगा। लोगों की अपेक्षा है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करें।

होगी सख्त कार्रवाई
घटना की जानकारी मिली है। मैं स्वयं सोमवार को स्कूल जाकर प्राचार्य, शिक्षकों और छात्राओं से पूछताछ करूंगा और दोषी शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई करूंगा।
चंद्रशेखर यादव,
बीईओ, बकावंड

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *