देश के इतिहास में पहली बार एक ही जगह, एक ही संगठन के 108 नक्सलियों का आत्मसमर्पण



जगदलपुर देश के नक्सल विरोधी अभियान की इतिहास में एक ही स्थल से सर्वाधिक रुपया 3.61 करोड़ की नगदी रकम तथा रुपया 1.64 करोड़ मूल्य का 01 कि.ग्रा. सोना माओवादियों द्वारा की गई डम्प से बरामद की गई।

‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’’ की पहल से प्रभावित होकर छ.ग. राज्य में विगत 26 महिनों में कुल 2714 माआवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ कर शांति पूर्ण एवं सामाजिक जीवन हेतु अग्रसर हुए।
उल्लेखनीय है कि बस्तर संभागांतर्गत 01 जनवरी 2024 से लेकर 09 मार्च 2026 तक की अवधि में कुल 2625 माओवादी कैडरों ने पुनर्वास से पुनर्जीवन का मार्ग अपनाया है।
दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के पश्चिम बस्तर डिवीजन के DVCM राहूल तेलाम, पण्डरु कोवासी एवं झितरु ओयाम, पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी के DVCM रामधर उर्फ बीरु, उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी के DVCM मल्लेश, PLGA बटालियन नं. 01 CYPC कमांडर मुचाकी, आंध्रा ओडिषा बार्डर (AOB) के DVCM कोसा मण्डावी जैसे प्रमुख नक्सल कैडर ने माओवादी संगठन के औचित्यहीनता एवं अंत को स्वीकारते हुए राष्ट्र कीे मुख्यधारा में लौट आये।

मुख्यधारा में लौट आये माओवादी कैडर्स के पुनर्वास, सुरक्षा एवं सम्मानजनक जीवन के लिए अवसर प्रदान कर उन्हें समाज में अंगीकृत करने हेतु भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों के अनुरुप सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं।
माओवादियों के डम्प से 07 नग AK-47, 10 नग INSAS रायफल, 05 नग SLR रायफल, 04 नग LMG रायफल, 20 नग .303 रायफल, 11 नग BGL लांचर्स सहित कुल 101 हथियार बरामद कर वर्तमान में कमजोर हो चुके माओवादी संगठन के सैन्यबल क्षमता को गहन आघात पंहुचाया गया है।

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित शौर्य भवन, पुलिस कोआर्डिनेशन सेंटर, लालबाग में आज ‘‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’’ पहल के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) से जुड़े कुल 108 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्याग कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया।
यह कार्यक्रम समाज के वरिष्ठ जनों, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के परिवारजनों, पुलिस महानिदेशक छ.ग.  अरुण देव गौतम भा.पु.से., अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्स.अभि)  विवेकानंद भा.पु.से., अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बीएसएफ  सिवांग नामग्याल भा.पु.से., पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज  सुन्दरराज पी. भा.पु.से., पुलिस महानिरीक्षक सीआरपीएफ शालीन भा.पु.से., पुलिस महानिरीक्षक छसबल  बी. एस. ध्रुव भा.पु.से., बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के पुलिस अधीक्षकगण, केंद्रीय सुरक्षा बलों तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में माओवादी संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी शामिल रहे। इनमें 05 डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM), 02 जोनल स्तर के PLGA कंपनी के प्रमुख पदाधिकारी (CYPC/M), 15 प्लाटून पार्टी कमेटी के सदस्य (PPCM), 21 एरिया कमेटी सदस्य (ACM) तथा 63 पार्टी सदस्य (PM) शामिल हैं। इन सभी पर मिलाकर लगभग 3.29 करोड़ रुपये की इनाम राशि घोषित है, जो इस सामूहिक आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि बनाती है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है और यह बस्तर रेंज में चल रहे समन्वित सुरक्षा एवं विकास प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों द्वारा प्रदान की गई सूचनाओं एवं अन्य खुफिया जानकारियों के आधार पर सुरक्षा बलों द्वारा विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण हथियारों की बरामदगी की गई है। इन कार्यवाहियों में बड़ी मात्रा में घातक हथियार एवं युद्ध सामग्री बरामद की गई है।
इस अभियान के तहत बरामद किए गए हथियारों में एके 47 राइफल 6 नग , एके 47 टीएआर 1 नग, इंसास राइफल 10 नग, कार्बाइन 1 नग, एसएलआर राइफल 5 नग, 7.62 मिमी. एलएमजी 1 नग, 5.56 मिमी. एलएमजी 2 नग, .303 मिमी एलएमजी 1 नग, .303 राइफल (20), 12 बोर राइफल (25), BGL लांचर (11), 51 मिमी मोर्टार (01), .315 बोर राइफल (03), मजल लोडिंग राइफल, भरमार (13) तथा मेगा BGL (01) शामिल हैं। इस प्रकार विभिन्न स्थानों से कुल 101 हथियार बरामद किए गए हैं।
जिला-वार कार्रवाई के दौरान नारायणपुर जिले से सर्वाधिक 49 हथियार, इसके अतिरिक्त बस्तर से 24, सुकमा से 12, बीजापुर से 09, दंतेवाड़ा से 05 तथा कांकेर से 02 हथियार बरामद किए गए।
बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से बरामद किए गए इन हथियारों एवं अन्य डंप सामग्री को कार्यक्रम के दौरान रेंज मुख्यालय जगदलपुर में प्रदर्शित किया गया, जिसे उपस्थित अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा आमंत्रित अतिथियों द्वारा देखा गया।
इस अवसर पर बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक ने स्पष्ट किया कि ”पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन“ पहल के माध्यम से हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं को पुनर्वास, सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और विश्वास के वातावरण को और अधिक सुद्ढ़ बनाना है, ताकि बस्तर क्षेत्र में शांति और प्रगति की नई संभावनाएँ साकार हो सकें।
राज्य शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त उन्हें समाज में सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करने हेतु जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि वे स्थायी रूप से मुख्यधारा के जीवन से जुड़ सकें।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण से क्षेत्र में माओवादी संगठन की संरचना एवं गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। साथ ही इससे क्षेत्र में सुरक्षा वातावरण और अधिक मजबूत होगा तथा सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार एवं अन्य विकास कार्यों को गति मिलने में सहायता प्राप्त होगी। स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों के सहयोग से क्षेत्र में विश्वास निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी विश्वास के वातावरण के परिणामस्वरूप अनेक भटके हुए युवा पुनः सामान्य जीवन की ओर लौटने का निर्णय ले रहे हैं। पूना मारगेम अर्थात पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के माध्यम से बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बचे हुए गिने-चुने शेष माओवादी कैडर्स से अपील की है कि हिंसा छोड़कर हथियार त्यागकर मुख्यधारा में लौंटे। शासन उनके सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्जवल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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