कभी करती थीं मजदूरी, आज हैं कार और ट्रैक्टर की मालकिन



जगदलपुर केंद्र और राज्य सरकारों ने कई ऎसी योजनाएं चला रखी हैं, जिनके दम पर गरीब से गरीब व्यक्ति भी बड़ा आसामी बन सकता है, बशर्ते उसमें लगनशीलता, नेक नीयत और कर्मठता हो। बस्तर की राजकुमारी कश्यप भी एक ऎसी ही कर्मयोगिनी है, जो कभी मजदूर थी और आज कार, ट्रैक्टर, दो मोटर साईकिलों और पक्के मकान की मालकिन बन चुकी है।


राजकुमारी कश्यप ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से गरीबी की बेड़ियों को तोड़कर स्वावलंबन का एक नया इतिहास रचा है। बस्तर के दरभा विकासखंड के लेंड्रा गांव की निवासी राजकुमारी कश्यप की जीवन यात्रा संघर्ष और आत्मविश्वास का एक जीवंत उदाहरण है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले राजकुमारी का जीवन अनिश्चितताओं से भरा था। उनके पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था और वह अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरे के खेतों में मजदूरी करने या जंगलों से प्राप्त वनोपज एवं अन्य संसाधनों पर निर्भर थी। उस दौर में वह गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। राजकुमारी के जीवन में बदलाव की शुरुआत बिहान योजना के माध्यम से तब हुई, जब वह वर्ष 2015 में सूरजमुखी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी। समूह से मिलने वाले प्रशिक्षणों ने न केवल उसके भीतर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा जगाई, बल्कि उसे अपनी समस्याओं के खिलाफ मुखर होना भी सिखाया। धीरे-धीरे राजकुमारी का आत्मविश्वास बढ़ता गया और उसने पशुपालन, चूजा ब्रिडिंग इकाई तथा राशन दुकान संचालन जैसे विविध व्यवसायों को अपनी आजीविका के रूप में अपनाया। आज वह एक कुशल पशुपालन उद्यमी के रूप में न केवल अपने ब्लॉक, बल्कि अन्य विकासखंडों में भी चूजों की सप्लाई और पशुओं के टीकाकरण का कार्य सफलतापूर्वक कर रही है।राजकुमारी दीदी की यह उद्यमशीलता उसके जीवन में एक बड़ी क्रांति लेकर आई है। कभी दूसरों के घर मजदूरी करने वाली राजकुमारी की आय 11 वर्षों के भीतर साढ़े तीन लाख से चार लाख रुपए तक पहुंच गई है, जिससे उसके परिवार का जीवन स्तर पूरी तरह बदल गया है। कभी मिट्टी के घर में रहने वाली राजकुमारी दीदी ने अब अपना पक्का घर बना लिया है और उनके पास खेती के लिए ट्रैक्टर, दो मोटर साइकिलें तथा एक कार भी है। आर्थिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ राजकुमारी ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई और अपनी सामाजिक पहचान भी बनाई। वर्तमान में वह संकुल संगठन की अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व कर रही हैं। अब उनका लक्ष्य अपनी खुद की हैचरी (मदर यूनिट) स्थापित करना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तार दे सकें।

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