शासन-प्रशासन की आंखों में रेत झोंक रहे हैं खनिज और पुलिस विभाग के कर्मी



अर्जुन झा-
बकावंड। विकासखंड बकावंड में सुशासन सरकार और प्रशासन की आंखों में धूल नहीं, बल्कि रेत झोंकने का काम खनिज विभाग के ही चंद अधिकारी और नगरनार थाने के अधिकारी कर रहे हैं। खनिज विभाग और पुलिस विभाग के कर्मी सांठगांठ कर नगरनार स्टील प्लांट के एक बड़े ठेकेदार को रेत की अवैध आपूर्ति धड़ल्ले से कर रहे हैं। इस काम में खनिज विभाग के ही एक अधिकारी के वाहनों का उपयोग हो रहा है।
काली कमाई के चक्कर सुशासन सरकार को कैसे बदनाम करते है उसकी बानगी बकावंड विकासखंड की अवैध रेत खदानों में चल रहा अवैध खनन है। जिला प्रशासन को भी खनिज विभाग दिग्भ्रमित कर रहा है। रेत से सोना बनाने का खेल पुलिस और खनिज विभाग कर रहे हैं। इलाके के प्रशासनिक अधिकारियों को बदनाम करने से भी ये भ्रष्ट कर्मी नहीं चूक रहे हैं। खनिज विभाग ने कुछ दिनों पहले दिखावे की कार्रवाई करते हुए अवैध रेत खनन में प्रयुक्त एक पोकलेन मशीन को जप्त किया था, मगर ग्रामीणों के तथाकथित विरोध का हवाला देकर जप्त पोकलेन को सुरक्षित जगह पर या किसी नजदीकी थाने में नहीं पहुंचाया गया, बल्कि अवैध रेत खदानों के आसपास ही छोड़ दिया गया। इस कार्रवाई के कुछ दिनों बाद ही उसी पोकलेन मशीन से दोबारा रेत का अवैध खनन शुरू कर दिया गया। जब इस संवाददाता ने इस संबंध में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया, तब बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देश पर प्रशिक्षु आईपीएस एवं बकावंड के एसडीएम विपिन दुबे ने सख्त कदम उठाते हुए पोकलेन मशीन को बेलगांव से जप्त कर जगदलपुर के थाने में लाकर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान खनिज विभाग के अधिकारियों ने आईपीएस विपिन दुबे को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी कि बेलगांव के पड़ोसी बनियागांव में भी रेत का अवैध खनन चल रहा है। चलने भी कैसे देते, क्योंकि यह काला कारोबार खुद विभाग के अधिकारी ही कर रहे हैं। बनियागांव में भास्कली नदी से लगातार रेत खनन आसानी से जारी है। इस कृत्य को खुद खनिज विभाग के चंद अधिकारी अंजाम दे रहे हैं।खनिज अधिकारी ने नगरनार थाना पुलिस के साथ मिलकर बनियागांव इलाके से रेत निकाल उसे बोरीगांव के रास्ते नगरनार स्टील प्लांट के ठेकेदार तक पहुंचा रहे हैं। रोज रात से सुबह तक दर्जनों हाइवा और टिप्परों के जरिए रेत का परिवहन उड़ीसा के रेत माफियाओं की मदद से किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इन इलाकों में वाहनों की आवाजाही से नदी तट पर उगाई गई फल सब्जी की फसलें चौपट हो रही हैं और पर्यावरण भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खनिज विभाग के एक अधिकारी के वाहन इस गोरखधंधे में लगे हुए हैं।

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