तालाब का दूषित पानी पीने मजबूर हैं गाड़ाघाट पारा के ग्रामीण



-अर्जुन झा-
बकावंड। यहां जल जीवन मिशन दम तोड़ चुका है, हैंडपंप बेदम हो गए हैं और ग्रामीण अपना दम यानि जिंदगी बचाने के लिए तालाब का दूषित पानी पीकर गुजारा करने मजबूर हैं। गांव के लोगों को बीमारियां अपनी चपेट में लेने लगी हैं। ग्रामीण जल संकट को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन ग्राम पंचायत और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को बस्ती के ग्रामीणों की जान की परवाह शायद नहीं है।
सरकार हर घर नल, हर घर जल उपलब्ध कराने हर संभव प्रयास कर रही है। जल जीवन मिशन, नल जल योजना के जरिए ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ विकासखंड मुख्यालय बकावंड की ग्राम पंचायत बकावंड की आश्रित बस्ती गाड़ाघाट पारा के लोग पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। ग्रामीणों ने कई बार पंचायत के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। गाड़ाघाट पारा में नल-जल योजना के नाम पर सिर्फ पाइप का ढांचा खड़ा है न पानी आता है, न कोई टोंटी है। हैंडपंप पर प्लास्टिक की थैली लटकी है। हैंडपंप वर्षों से बंद पड़ा है। आसपास धूल-मिट्टी, सूखी जमीन पानी की एक बूंद नजर नहीं आ रही है। पूर्व उपसरपंच बेलरसन कश्यप ने बताया कि गाड़ाघाट पारा के 40-50 घरों में पीने के पानी की भारी किल्लत है। नल-जल योजना की पाइप लाइन सालभर पहले लगी थी, लेकिन आज तक पानी नहीं आया। हैंडपंप खराब पड़े हैं। मजबूरी में ग्रामीण तालाब का गंदा पानी पी रहे हैं। इसी पानी से भोजन तैयार किया जाता है और पानी का इस्तेमाल पेयजल के रूप में किया जाता है। जिस तालाब में ग्रामीण, मवेशी नहाते हों और गंदे कपड़े धोए जाते हों, उस पानी की गुणवत्ता का अंदाजा आप लगा सकते हैं। मगर बेबस ग्रामीण उसी दूषित पानी को पी रहे हैं। इसके चलते महिलाएं, बच्चे-बूढ़े बीमार पड़ रहे हैं।

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