पाईकपाल में नाली निर्माण के नाम पर लाखों के वारे न्यारे



बुधराम नेताम-
बकावंड। विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पाईकपाल में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत स्वीकृत नाली निर्माण कार्य में गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। ग्रामीणों एवं शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिस नाली निर्माण कार्य के लिए कुल 5.40 लाख की स्वीकृति दी गई थी, उसी कार्य के नाम पर तीन किश्तों में 2.71 लाख रुपए, 2.69 लाख रुपए और 2.70 लाख रुपए समेत कुल 8.10 लाख की राशि निकाल ली गई। आरोप है कि यह निकासी स्वीकृत राशि से 2.70 लाख अधिक है, जबकि संबंधित नाली का निर्माण आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 में ग्राम पंचायत पाईकपाल में 150 मीटर एवं 200 मीटर लंबाई की दो नालियों की स्वीकृति मिली थी। 150 मीटर की नाली का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन 200 मीटर की नाली अभी भी अधूरी है। इसके बावजूद वर्तमान सरपंच सोमारी कश्यप एवं पंचायत सचिव लिंगोराम विश्वकर्मा पर आरोप है कि कथित रूप से फर्जी मूल्यांकन कराकर अधूरे कार्य को पूर्ण दर्शाया गया और लाखों रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया गया।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास बैंक पासबुक की एंट्री सहित निकासी से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर पूरे मामले की जांच कराई जा सकती है। उनका दावा है कि यदि बैंक रिकॉर्ड और पंचायत के वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।बताया गया है कि इस मामले की लिखित शिकायत करीब 9 माह पहले जिला कलेक्टर को भी दी गई थी, लेकिन अब तक न तो स्थल निरीक्षण हुआ और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा जांच पूरी की गई। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

लाजिमी हैं ये सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब स्वीकृति राशि 5.40 लाख थी, तो 8.10 लाख का भुगतान किस आधार पर हुआ? अधूरे निर्माण की माप पुस्तिका (मेजरमेंट बुक) किस अधिकारी ने तैयार की? तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई? भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन क्यों नहीं कराया गया? और शिकायत मिलने के बावजूद जनपद पंचायत स्तर पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी सरपंच, सचिव, संबंधित तकनीकी अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए शासकीय राशि की वसूली की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे और जनता का विश्वास कायम रहे।

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