सेवा साधना के एक यशस्वी अध्याय का समापन: संकुल प्राचार्य  अशोक यादव को दी गई भावभीनी विदाई

जगदलपुर
ज्ञान के मंदिर में निष्ठा, अनुशासन और समर्पण की अविरल धारा प्रवाहित करने वाले शासकीय संकुल केंद्र माड़पाल के संकुल प्राचार्य श्री अशोक यादव के शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने के पावन अवसर पर एक अत्यंत गरिमामयी, आत्मीय एवं भावुक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह क्षण जहाँ एक ओर उनके दीर्घकालिक उत्कृष्ट सेवाकाल के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का था, वहीं दूसरी ओर एक कुशल मार्गदर्शक के बिछड़ने के अहसास से हर आँख नम थी।
इस गौरवमयी संध्या में श्री यादव के जीवन पथ की संबल उनकी धर्मपत्नी, बेटी-दामाद एवं सुपुत्र की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को पारिवारिक आत्मीयता से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात, कार्यक्रम की बागडोर संभाल रहे श्री सचिन कारेकर ने अपने काव्यमयी एवं सुमधुर संचालन से समारोह को एक साहित्यिक ऊँचाई प्रदान की।
सम्बोधन की कड़ी में कलावती गुप्ता (प्रधान पाठक), अंजू तिवारी (सहायक शिक्षक), देवराज खूटे (सहायक शिक्षक), सतरूपा मिश्रा (व्याख्याता/लेक्चरर), श्री शिव सिंह चंदेल, अनुपम सरकार एवं शाला प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष श्री मंगल राम कुंवर ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में श्री यादव के निश्छल व्यक्तित्व, प्रशासनिक कुशलता और शिक्षा के प्रति उनके अनन्य प्रेम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्री यादव का कार्यकाल केवल एक शासकीय सेवा नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के निर्माण का एक स्वर्णिम युग रहा है।
इसके उपरांत, नव-नियुक्त प्रभारी संकुल प्राचार्य श्रीमती गीता मोहंती एवं संकुल परिवार के समस्त शिक्षकों व सहयोगियों द्वारा पूज्य प्राचार्य जी को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न एवं उपहार भेंट कर उनका भावभीना अभिनंदन किया गया तथा उनके सुखद उत्तर-प्राप्त जीवन की कामना की गई।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सेवानिवृत्त संकुल प्राचार्य श्री अशोक यादव अत्यंत भावुक हो उठे। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान किए गए प्रमुख शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। साथ ही, संकुल व शाला संस्था में बिताए अपने वर्षों के अनमोल अनुभवों, चुनौतियों और मधुर स्मृतियों को सभी के साथ साझा करते हुए कहा कि—”सहयोगियों का अटूट विश्वास और स्नेह ही मेरी असली पूंजी है।”
समारोह के अंतिम चरण में संकुल समन्वयक श्री आलोक चौबे ने पधारे हुए सभी अतिथियों, परिजनों, शिक्षकों एवं जनसामान्य के प्रति हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया, जिसके पश्चात कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।
इस गरिमामयी अवसर पर संकुल केंद्र माड़पाल के समस्त प्रधान पाठक, शिक्षक, सहायक शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

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