जानलेवा बने एनएमडीसी स्लरी पाइपलाइन प्रोजेक्ट के 10 फीट गहरे गड्ढे
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर जिले में स्थापित नगरनार स्टील प्लांट तक लौह अयस्क की सुचारु आपूर्ति के लिए दंतेवाड़ा जिले के बचेली स्थित खदानों से
एनएमडीसी द्वारा 138 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। लगभग 2,900 करोड़ रुपए से 3,500 करोड़ का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट प्रशासनिक लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी के कारण आम लोगों और किसानों के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन चुका है।
मानसून के दौरान निर्माण और खोदाई कार्यों पर शासन स्तर से लगी रोक के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बारिश के बीच पोकलेन मशीनों से धड़ल्ले से खोदाई की जा रही है। नेरली और कमेली समेत कई इलाकों में पाइप लाइन बिछाने के लिए करीब 10-10 फीट गहरे गड्ढे खोदे गए हैं। बारिश के पानी से भरे ये गड्ढे अब जानलेवा तालाब का रूप ले चुके हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि ठेकेदारों द्वारा इन खतरनाक गड्ढों के आसपास न तो सुरक्षा घेरा (बैरिकेडिंग) लगाया गया है, न ही कोई रिफ्लेक्टर या रेड टेप जैसी चेतावनी संकेत दिए गए हैं।
हादसों से नहीं लिया सबक
उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष मानसून के दौरान गीदम और भांसी क्षेत्र में इसी तरह के खुले गड्ढों में गिरने से दो मासूम बच्चों की जान चली गई थी। इस हादसे के बाद प्रशासन ने जून से सितंबर तक बारिश के मौसम में खोदाई पर सख्त अल्टीमेटम जारी किया था, लेकिन इस बार भी नियमों को दरकिनार कर काम जारी है। यह पाइप लाइन दंतेवाड़ा जिले के दर्जनों किसानों के खेतों से होकर गुजर रही है। जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण कार्य तो किया गया, लेकिन काम खत्म होने के बाद खेतों की सुध नहीं ली गई।
ये हैं असल मुसीबत
पाइप लाइन डालने के बाद भरी गई मिट्टी धंस चुकी है, जिससे खेत दलदल बन गए हैं। खेतों में मवेशी जाकर फंस रहे हैं। खेतों की बदतर स्थिति के कारण इस वर्ष अधिकांश किसान अपनी धान की बोआई तक नहीं कर पाए हैं।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
मुआवजे के बावजूद खेतों को खेती-योग्य न बनाए जाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी से प्रभावित किसानों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर अवैध खोदाई रोकने और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
