मंत्री केदार कश्यप की पत्नी को जमीन आबंटन पर विधायक विक्रम मंडावी का करारा हमला

जगदलपुर। बीजापुर क्षेत्र के तेज तर्रार विधायक विक्रम मंडावी ने प्रदेश के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की पत्नी के नाम पर रायपुर में जमीन आवंटन को लेकर करारा हमला बोला है। उन्होंने मंत्री कश्यप से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग तक कर डाली है।
एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी की कंपनी को रायपुर में लाखों की जमीन के बदले करीब 20 करोड़ रुपये का प्लॉट दिए जाने की शिकायत पर बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि मंत्री केदार कश्यप के 17 साल 9 महीने के असली विकास अब उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी की कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड की कचना-नालापारा में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। पहुंच मार्ग संकरी है और कीमत भी कम है। इसके बदले आरडीए सड्डू में एमआर-43 के पास प्लॉट नंबर 25 आवंटित कर रहा है। जो लगभग 2,168 वर्गमीटर है और उसकी अनुमानित कीमत करीब 20 करोड़ रुपए है। कंपनी में मंत्री केदार कश्यप की पत्नी निदेशक बताई गई हैं। आरडीए कहता है कि प्रक्रिया नियमसम्मत है। और दूसरी ओर जनता पूछ रही है नियम गरीब के लिए अलग, मंत्री परिवार के लिए अलग ऐसा क्यों ?
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बस्तर में आदिवासियों की पैतृक जमीने छीनी जा रही है बस्तर के आदिवासी अपनी जमीनों को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इस पर वनमंत्री केदार कश्यप कुछ नहीं कहते हैं और सरकार आंखे मूंद रखी है। वन भूमि, निस्तार, ग्रामसभा की सहमति सब कागज पर रह जाते हैं। लेकिन राजधानी रायपुर में मंत्री केदार कश्यप अपने परिवार की कंपनी को 20 करोड़ के जमीन का प्लॉट दिलाने के लिए दिन-रात संघर्ष करने में लगे हुए हैं कि किसी तरह उन्हें 20 करोड़ की जमीन आसानी से मिल जाए। विधायक विक्रम मंडावी ने सवाल पूछा कि 17 साल 9 महीने मंत्री पद पर बैठकर बस्तर को सड़क, स्कूल, अस्पताल और न्याय देने का दावा करने वाले मंत्री केदार कश्यप अपने घर के लिए 20 करोड़ की जमीन कैसे जुटा रहे हैं? विक्रम मंडावी ने कहा “यह विकास नहीं, सत्ता का दोहरा चेहरा है। एक तरफ बस्तर के गरीब आदिवासी अपनी जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे है, वहीं दूसरी तरफ वन मंत्री केदार कश्यप अपने पत्नी को 20 करोड़ की जमीन दिलाने की लड़ाई लड़ रहे है। 17 साल 9 महीने का हिसाब अब जनता के सामने आ गया है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे आवंटन की स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच, आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई और वनमंत्री केदार कश्यप के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *