छह महीने से अधूरी पड़ी है सड़क, धूल-गड्ढों से नागरिक परेशान



जगदलपुर नगर के नयापारा में गांधी मैदान से न्यायालय की ओर जाने वाली निर्माणाधीन सड़क 31 मार्च से अधूरी पड़ी है। महीनों बीतने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं होने से सड़क पर गड्ढे, मिट्टी और धूल की स्थिति बनी हुई है। यह मार्ग शहर के महत्वपूर्ण संस्थानों को जोड़ता है, फिर भी निर्माण की धीमी रफ्तार को लेकर अब सीधे संबंधित विभाग और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 31 मार्च से काम बंद है तो जिम्मेदार अधिकारी अब तक क्या कर रहे हैं? निर्माण कार्य की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर कौन अधिकारी जिम्मेदार है? क्या अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया? यदि किया, तो अधूरा काम देखकर आगे की कार्रवाई क्या की गई? और यदि निरीक्षण ही नहीं हुआ तो सार्वजनिक सड़क के निर्माण की मॉनिटरिंग किस स्तर पर हो रही है?स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के दौरान सड़क पर पानी और कीचड़ के कारण स्थिति बेहद खराब रही। गड्ढों के चलते कई दोपहिया वाहन चालकों के फिसलकर गिरने की बात भी सामने आई है। अब बारिश के बाद सूखी मिट्टी और धूल लोगों के लिए नई परेशानी बन गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि आपसी विवाद के कारण निर्माण कार्य बंद हुआ। यदि वास्तव में किसी विवाद के कारण काम रुका है तो संबंधित विभाग ने उसे सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए? क्या ठेकेदार को काम दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया गया? क्या उसे नोटिस जारी किया गया? यदि अनुबंध की शर्तों के मुताबिक कार्रवाई का प्रावधान है तो अब तक उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? सवाल निर्माण एजेंसी पर भी है, लेकिन उससे पहले निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है। सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत राशि, कार्यादेश, निर्धारित समयसीमा और अब तक की प्रगति की जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? यदि समय सीमा खत्म हो चुकी है तो देरी के लिए किसकी जिम्मेदारी तय की गई? क्या संबंधित अधिकारी ने उच्च स्तर पर देरी की रिपोर्ट भेजी है?

वीआईपी रोड है यह
यह रास्ता सामान्य गली नहीं, बल्कि वीआईपी रोड है। विधायक कार्यालय, न्यायालय और लाइब्रेरी जैसे महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने वाले लोगों को इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। ऐसे में महीनों तक सड़क का अधूरा रहना केवल निर्माण की समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा विषय है।स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारियों को अब केवल आश्वासन देने के बजाय मौके पर जाकर स्थिति देखनी चाहिए और सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि सड़क कब तक पूरी होगी। साथ ही निर्माण रुकने का वास्तविक कारण, जिम्मेदार एजेंसी और अब तक की विभागीय कार्रवाई की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।जनता की नजर अब इस बात पर है कि संबंधित अधिकारी इस सड़क को लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं। यदि काम जल्द शुरू होता है तो उसकी समयसीमा भी स्पष्ट होनी चाहिए। और यदि किसी वजह से निर्माण फिर टलता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

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