प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री बस्तर के आदिवासियों का देवस्थान नंदराज पर्वत को उद्योगपतियों को सौंपने में लगे हैं- विक्रम मंडावी

बीजापुर 30-09-2026 :- सात साल पहले आदिवासियों के उग्र आंदोलन के बाद जिस नंदराज पर्वत पर खनन रुक गया था, उसी पवित्र पहाड़ पर विष्णुदेव साय सरकार ने फिर लौह अयस्क निकालने और हजारों पेड़ काटने की अनुमति दे रहे है। वन विभाग ने पहले चरण में ही 7200 पेड़ काटने की मंजूरी दे दी है। लौह अयस्क के सैंपल निकलकर नगरनार भेजे जा चुके हैं। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने इसे आदिवासी आस्था पर सीधा हमला बताते हुए नंदराज पर्वत पर लौह खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग सरकार से की है।


विक्रम मंडावी ने अपने अपने प्रेस बयान में कहा कि बस्तर के आदिवासी नंदराज पहाड़ को सिर्फ पहाड़ नहीं मानते। यह पिटोर रानी माता और नंदराज देवता का निवास है। 2019 में 50 गांवों के लोगों ने किरंदुल में महाआंदोलन किया था। फर्जी ग्रामसभा के आरोप लगे थे। आज वही पहाड़ फिर उद्योगपतियों के हवाले कर दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने अपने ही समुदाय की आस्था और जंगल को उद्योगपतियों को क्यों सौंप दिया है?
विधायक विक्रम मंडावी का आरोप है कि 2017 की ग्रामसभा पहले ही शून्य घोषित हो चुकी थी। उसमें मृत व्यक्तियों के अंगूठे और फर्जी दस्तखत पाए गए थे। जांच रिपोर्ट शासन के पास लंबित है। नई ग्रामसभा की मंजूरी के बिना काम आगे बढ़ाया जा रहा है। पेसा कानून और वन अधिकार कानून की खुली अवहेलना हो रही है। अनुसूचित क्षेत्र में खनन से पहले ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की विष्णुदेव साय सरकार कानून को दरकिनार कर रही है।
विधायक विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि विष्णुदेव साय खुद आदिवासी समुदाय से हैं। बस्तर के लोग उनसे उम्मीद करते थे कि वे जल, जंगल, जमीन और आस्था की रक्षा करेंगे। इसके बजाय उनके कार्यकाल में नंदराज जैसे पवित्र पर्वत पर फिर खनन की तैयारी शुरू हो गई। भाजपा की डबल इंजन सरकार बस्तर के संसाधनों को उद्योगपतियों तक पहुँचाने में लगी हुई है। नंदराज उसी कड़ी का हिस्सा बन गया है।
खनन के नाम पर आदिवासियों के देवता का निवास नष्ट किया जा रहा है। पेड़ों की कटाई सिर्फ पर्यावरण नहीं, आस्था पर हमला है।
विधायक विक्रम मंडावी ने सीधा सवाल किया सरकारें जनता के लिए बनती हैं। सत्ता में आने के बाद जनता के लिए काम करना चाहिए। लेकिन छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार बनने के बाद पूरा ध्यान इस बात पर है कि बस्तर का जल, जंगल, जमीन और खनिज कैसे उद्योगपतियों तक पहुँचे। सवाल साफ है यह सरकार किसके लिए काम कर रही है? जनता के लिए या उद्योगपतियों के लिए?
आदिवासी मुख्यमंत्री को इस फैसले की जवाबदेही लेनी होगी। नंदराज पहाड़ को बचाने का संघर्ष आस्था का संघर्ष है, जंगल का संघर्ष है और बस्तर की पहचान का संघर्ष है। हम इस लड़ाई में आदिवासी समाज के साथ खड़े हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *