धान परिवहन में धान शार्टेज का चल रहा है बड़ा खेल, धर्मकांटा से भी कर लिया गया सांठ गांठ

छोटे कापसी (राजदीप शर्मा) – धान परिवहन के दौरान छोटे बड़े खेल हमेशा से ठेकेदार के द्वारा खेला जाता है । जिसका खामियाजा खरीदी करने वाले समितियों एवं खरीदी प्रभारियों को भुगतना पड़ रहा है । परलकोट अंतर्गत खरीदी केंद्र से संग्रहण केंद्र कांकेर वन,लखनपुरी भेजे गए ट्रकों में धान के वजन को ठेकेदार एवं संग्रहण केंद्र प्रभारी की सांठगांठ से कम किया जाता है।

खरीदी केंद्र से संग्रहण केंद्र धान भर कर गई ट्रक के ड्राइवर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की मेरे द्वारा पीवी 26 नंबर केंद्र से धान भरकर संग्रहण केंद्र गया। केंद्र प्रभारी ने पखांजूर से धर्मकांटे में कांटा किया लगभग तीन क्विंटल धान ज्यादा हुआ पर
संग्रहण केंद्र के धर्मकांटे में बराबर किया गया। जिस ट्रक का वजन पखांजूर में बराबर होता है वह ट्रक संग्रहण केंद्र में एक से दो क्विंटल धान कम होता है जो ठेकेदार एवं संग्रहण केंद्र प्रभारी की सांठगांठ से धर्मकांटे में किया जाता है। धान कम होने पर ट्रकों को पावती नही दी जाती कमी को पूरा करने के बाद पावती दी जाती है, फिर उसका भाड़ा बनता है।

फायदा उठा रहे परिवहन एवं संग्रहण केंद्र से जुड़े लोग

धान में शॉर्टेज का सारा खेल तौलाई की मान्यता वाले धर्मकांटे के आड़ में हो रहा है. खरीदी केंद्र वाले धान लोड कराने से पहले और लोड के बाद स्थानीय धर्मकांटे में अपने सामने तौल कर भेजते हैं लेकिन ठेकेदार की सेटिंग के चलते संग्रहण केंद्र में अपने जुगाड़ वाले दूसरे धर्मकांटे में तौल करवाता है।

केंद्र प्रभारियों ने बताए की स्थानीय तौल को मान्यता नहीं दिया गया है.जब हमारे द्वारा पखांजूर वेयरहाउस,बड़े कापसी लैम्पस में कांटा करते है बराबर होता है और संग्रहण केंद्र के धर्मकांटा में तौल कम बताया जाता है, इस तौल में परिवहन ठेकेदार (ट्रांसपोर्ट) से जुड़े लोग और संग्राहन केंद्र के लोग मौजूद होते हैं. इसे अधिकृत तौल बताया जाता है. इस उनके द्वारा शॉर्टेज का खेल खेला जाता है।

इस तौलाई मे जो भी कमी आई उसे खरीदी केंद्र वालों से भरपाई करवाने के लिए गाड़ी वाले को खाली करने की पावती नही दी जाती जब तक गाड़ी वाला शॉर्टेज धान को पूरा नही करता। जबकि खरीदी केंद्र से निकलने के बाद संग्रहण केंद्र तक सही सलामत पहुंचाने की जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर की होती है. लेकिन परिवहन ठेकेदार की ऊंची पहुँच के चलते अधिकारीयों की साठगांठ से खरीदी केंद्र प्रभारियों पर दबाव बना कर शॉर्टेज को वसूला जाता है।

अधिकृत तौलाई के गलत नियम का ही फायदा परिवहन ठेकेदार (ट्रांसपोर्ट) एवं संग्रहण केंद्र से जुड़े लोग उठा रहे हैं. जबकि धान खरीदी से पहले ही खरीदी प्रभारियों ने स्थानीय धर्मकांटा को भी मान्यता देने की मांग जिला प्रसाशन से करते आ रहे हैं.

इस विषय पर पखांजूर लैम्पस प्रबंधक रतन हालदार ने बताया कि पखांजूर वेयरहॉउस एवं बड़े कापसी लैम्पस के धर्मकांटे में तौल बराबर आता है लेकिन संग्रहण केंद्रों में एक से दो क्विंटल की शॉटेज आता है। समझ नही आ रहा कि कौन सा कांटा सही है और कौन सा गलत।

इस संबंध पर परिवहन ठेकेदार मनोज राठी से संपर्क किया गया उनके द्वारा कहा गया कि मेरी तबियत ठीक नही है मैं बेड रेस्ट पर हूं। मेरे दूसरे साथी से बात कर लीजिए।

इस विषय पर परिवहन ठेकेदार सम्यक चोपड़ा ने बतलाया कि मैं दस मिनट के बाद बात करता हूं। उनके द्वारा फिर फोन नही किया गया।

इस संबंध पर कांकेर डीएमओ आशुतोष कोसरिया ने बताया कि समिति एवं खरीदी केंद्रों के द्वारा लोडिंग के दौरान गाड़ी वाले के सामने अगर रैंडम तौल कर भेजेने से शाँटेज की परेशानी नही होगी।

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