बस्तर के अंदरूनी इलाकों की समस्याओं पर ‘विजय’ का चैप्टर


कलेक्टर विजय दयाराम के. की पहल से ग्रामीण खुश


जगदलपुर (अर्जुन झा ):- बस्तर जिले में आज भी ऐसे कई गांव हैं, जहां पहुंच पाना आसान नहीं है। इन गांवों के लोग शेष दुनिया से कटे हुए हैं। वहां सरकार ने अब तक न सड़कें बनवाई हैं, न बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा का इंतजाम किया है। हुक्मरान कभी ऐसे बदनसीब गांवों की ओर झांकने तक की जहमत नहीं उठे। वे तो बस फलां गांव में ये करो, फलां गांव में वो करो जैसा फरमान जारी कर देते हैं। हुक्मरान के फरमान पर तामिल करने की जवाबदेही अफसरान पर होती है। ऐसे अफसर बहुत कम होते हैं, जो रिमोट एरिया के गांवों में जाकर ग्रामीणों का दर्द बांटते हैं। मगर बस्तर जिले में विकास का नया सूरज उदित हो चुका है, जिसने ऐसे गांवों की समस्याओं पर विजय का नया चैप्टर खोल दिया है। ग्रामीणों के बीच उम्मीद की किरण बिखेरने वाला नया सूरज कोई और नहीं, बल्कि कलेक्टर विजय दयाराम के. हैं। कलेक्टर विजय ने ही समस्याओं पर विजय का नया अध्याय लिखना शुरू किया है।

बस्तर संभाग नक्सल प्रभावित है। नक्सलियों के उत्पात बस्तर जिले में दूर दराज स्थित दर्जनों गांवों को तरक्की से दूर कर रखा है। इन गांवों में सरकरी गाड़ियां बहुत कम पहुंच पाती हैं। जहां सरकारी गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं, उन गांवों तक सरकारी योजनाएं किस हद तक पहुंच पाती होंगी, इसका अंदाजा लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है। बस्तर जिले की दरभा घाटी और बिनता घाटी की तलहटी पर बसे अनेक गांव विकास से कोसों दूर हैं। ऐसे दुर्गम गांवों में भी अब विकास का उजास फैलने लगा है और वहां के ग्रामीणों के होठों पर मुस्कान तिर आई है। अति संवेदनशील माने जाने वाले चांदामेटा क्षेत्र के पटेलपारा, मुड़ियापारा, गदमेपारा के ग्रामीण सड़क, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे थे। बस्तर जिले की कमान सम्हालते ही कलेक्टर विजय दयाराम के. के कदम इन दुर्गम गांवों में पड़े। फिर तो ग्रामीणों के भाग्य ही जाग गए। कलेक्टर विजय ने इन बस्तियों की समस्याओं पर विजय का चैप्टर ही खोल दिया। का विस्तार हुआ है। कलेक्टर विजय दयाराम के. ने उसी समय संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दे दिए थे कि इन बस्तियों में सड़क, पानी, बिजली आदि का इंतजाम तय टाइम लिमिट में हो जाना चाहिए। जिले के सबसे बड़े अफसर के फरमान को मातहत अधिकारी टाल नहीं सकते थे, सो उन्होंने जी जान लगाकर इन बस्तियों को सुविधाओं से लैस करने का काम शुरू कर दिया। फरमान जारी कर कलेक्टर विजय दयाराम के. अपने चेंबर में चुप बैठे नहीं रह गए, वरन उन्होंने दोबारा उन गांवों में जाकर अपने फरमान पर अमल का जायजा भी लिया। कलेक्टर विजय दयाराम के. आठ माह पहले बस्तर में अपनी तैनाती के तीसरे दिन ही कोलेंग, चांदामेटा क्षेत्र के भ्रमण पर गए थे। वहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की और उनका दुख दर्द जाना था। ग्रामीणों ने कलेक्टर से सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भवन की थी, जो अब पूरी हो चुकी हैं। चांदामेटा से पटेल पारा तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क विकास निगम ने सड़क बनवा दी है। पटेलपारा, मुड़ियापारा, गदमेपारा और टोंडरापारा को दो माह पहले ही बिजली सुविधा मिल गई है। बरसों बाद विद्युत की रोशनी मिलने से ग्रामीण में खुशी छा गई है। पेयजल आपूर्ति के लिए इन बस्तियों में सोलर नल जल योजना स्थापित की गई है। पटेलपारा के ग्रामीण ऊरा कुंजाम ने कलेक्टर को बस्ती के लिए फरिश्ता बताते हुए कहा कि पहले हमें अपने घरों में रौशनी के लिए लालटेन व दीयों का सहारा लेना पड़ता था। मिट्टीतेल उपलब्ध न होने की स्थिति में खाद्य तेल से दीपक जलाना पड़ता था या फिर लट्ठे जलाकर उसकी लपटों से घरों में उजाला करते थे। अब बिजली सुविधा उपलब्ध हो जाने से बल्ब और ट्यूब लाईट की अच्छी रौशनी घरों में बिखर रही है। बच्चे रात में अच्छी तरह पढ़ाई करने लगे हैं। पटेलपारा की पीसो बाई इस बात से खुश है कि उसे अब घर की जरूरत के लिए पानी का इंतजाम करने नाले व पोखर तक जाना नहीं पड़ता। सोलर नल जल योजना से शुद्ध पेयजल मिल रहा है।घर में ही पानी मिल जाने से उसे थकान से मुक्ति मिल गई है और उसका समय भी जाया नहीं हो रहा है। पीसो बाई ने कहा अब मेरे घर में भी बिजली लाइन से रोशनी होती है। पीसोबाई ने कलेक्टर विजय दयाराम के. को देवदूत तक बता दिया। गांव के सरपंच आयता ने कहा कि पहले सड़क के अभाव में पटेलपारा के लोगों को बड़ी परेशानी होती थी। सड़क बन जाने से ग्रामीणों को सहूलियत हो रही है। कोलेंग में स्कूल खुल जाने से गांव के बच्चों को गांव में ही शिक्षा मिल रही है। गांव के दो युवा इस स्कूल में अतिथि शिक्षक के तौर पर अध्यापन सेवा दे रहे हैं। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र भी शुरू हो गया है। स्कूली विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं अब आंगनबाड़ी केंद्र भी के बच्चों के जाति प्रमाण पत्र जल्द बन जाएंगे। कोलेंग के ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में नियमित रूप से भेजने लगे हैं।

कोलेंग स्थित कन्या आश्रम तक मनरेगा के तहत पहुंच मार्ग और बाजार में शेड निर्माण भी जल्द शुरू हो जाएगा।
बिनता घाटी की भी बिनती सुनेंगे डीएम ?
बस्तर जिले की लोहंडीगुड़ा जनपद पंचायत के भी अनेक गांव अभावग्रस्त हैं। इन गांवों में आज तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। बिनता घाटी में स्थित लोहंडीगुड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत भेजा और आश्रित गांव कोरली इन समस्याग्रस्त गांवों में शुमार हैं। यहां बिजली, व्यवस्थित सड़क, शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं है। बिनता घाटी के कई गांवों तक पहुंच पाना भी आसान नहीं है। बारिश के मौसम में इंद्रावती नदी की वजह से बहुत से गांव चार – पांच माह तक शेष दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं। एक गांव के दो शिक्षक तो खुद नाव चलाते हुए अपने स्कूल तक पहुंचते हैं। इन शिक्षकों को बारहों माह ऐसा उपक्रम करना पड़ता है। उन्हें नदी पार कराने के लिए ग्रामीणों ने नाव बनाकर दे रखी है। दरअसल इन शिक्षकों का पैतृक गांव नदी उस पार स्थित है। बरसात के मौसम में जब इंद्रावती नदी भारी उफान पर रहती है, तब दोनों शिक्षकों को स्कूल वाले गांव में ही कई दिनों तक बसेरा करना पड़ता है। इस दौरान उनके भोजन और ठहरने की व्यवस्था ग्रामीण अपने घरों में बारी बारी से करते हैं। भेजा ग्राम पंचायत का आश्रित ग्राम कोरली इंद्रावती के किनारे बसा हुआ है और आकर्षक पर्यटन स्थल है। अगर कोरली को हर तरह की बुनियादी सुविधा मिल जाती है, तो यह गांव भी बस्तर का सबसे उत्तम पर्यटन स्थल बन सकता है। बिनता घाटी के ग्रामीणों की मांग है कि कलेक्टर उनकी भी बिनती सुन लें।

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